केरल बना ‘केरलम’: मोदी कैबिनेट ने दी नाम बदलने के प्रस्ताव को हरी झंडी, जानें पूरी प्रक्रिया

तिरुवनंतपुरम. भारत के दक्षिणी राज्य केरल की पहचान अब वैश्विक स्तर पर बदलने वाली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को नई दिल्ली स्थित ‘सेवा तीर्थ’ (नया पीएमओ भवन) में आयोजित केंद्रीय मंत्रिमंडल की पहली बैठक में एक ऐतिहासिक फैसला लिया गया। केंद्र सरकार ने केरल राज्य का नाम बदलकर आधिकारिक रूप से ‘Keralam’ (केरलम) करने के राज्य सरकार के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है।

चुनावी माहौल में ‘भाषाई अस्मिता’ का दांव

यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब केरल में अप्रैल-मई 2026 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केंद्र द्वारा इस मांग को स्वीकार करना राज्य की सांस्कृतिक और भाषाई भावनाओं का सम्मान है, जो चुनाव में एक बड़ा मुद्दा बन सकता है।

क्यों बदला जा रहा है नाम? (मुख्य कारण)

मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने इस प्रस्ताव को पेश करते समय स्पष्ट किया था कि ‘केरल’ शब्द मुख्य रूप से अंग्रेजी और औपनिवेशिक प्रभाव के कारण प्रचलन में आया, जबकि स्थानीय लोग और मलयालम भाषा में इसे हमेशा से ‘केरलम’ ही कहा जाता रहा है।

  • मलयालम पहचान: राज्य की मुख्य भाषा मलयालम में ‘केरलम’ शब्द की गहरी जड़ें हैं।

  • ऐतिहासिक मांग: 1956 में भाषाई आधार पर राज्यों के गठन के समय से ही ‘एकीकृत केरलम’ बनाने की मांग उठती रही है।

  • संविधान में संशोधन: वर्तमान में संविधान की पहली अनुसूची में राज्य का नाम ‘Kerala’ दर्ज है, जिसे अब सभी भाषाओं में ‘Keralam’ किया जाएगा।

लंबी कानूनी प्रक्रिया का अंत

केरल विधानसभा ने इस संबंध में 24 जून 2024 को सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया था। हालांकि, यह सफर इतना आसान नहीं था:

  1. अगस्त 2023: विधानसभा ने पहली बार प्रस्ताव भेजा, लेकिन तकनीकी खामियों के कारण इसे गृह मंत्रालय द्वारा वापस भेज दिया गया।

  2. जून 2024: सीएम विजयन ने संशोधित प्रस्ताव पेश किया, जिसे सदन ने बिना किसी विरोध के पास कर दिया।

  3. फरवरी 2026: केंद्रीय कैबिनेट ने तकनीकी संशोधनों को स्वीकार करते हुए प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी दी।

अब आगे की प्रक्रिया क्या होगी?

कैबिनेट की मंजूरी के बाद, अब गेंद संसद के पाले में है। नाम परिवर्तन की प्रक्रिया के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जाएंगे:

  • अनुच्छेद 3 और 4: भारत के संविधान के अनुच्छेद 3 और 4 के तहत संसद में एक विधेयक लाया जाएगा।

  • संवैधानिक संशोधन: संविधान की पहली अनुसूची में बदलाव किया जाएगा ताकि ‘केरल’ की जगह ‘केरलम’ शब्द प्रतिस्थापित हो सके।

  • आधिकारिक दस्तावेज़: मंजूरी मिलने के बाद केंद्र और राज्य सरकार के सभी गजट, पासपोर्ट, आईडी कार्ड और सरकारी बोर्डों पर ‘Keralam’ लिखा जाएगा।

केरलम का नाम बदलना केवल वर्तनी का बदलाव नहीं है, बल्कि यह एक राज्य की अपनी जड़ों की ओर लौटने की यात्रा है। जहाँ एक तरफ राज्य सरकार इसे अपनी जीत बता रही है, वहीं केंद्र सरकार के इस सहयोग को ‘सहकारी संघवाद’ के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

matribhumisamachar.com

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