बांग्लादेश: PM तारिक रहमान का नया ठिकाना क्या होगा? ‘गणभवन’ के बाद अब ‘जमुना’ की बारी

ढाका. बांग्लादेश में डेढ़ दशक लंबे इंतजार के बाद लोकतंत्र की वापसी हुई है। 12 फरवरी को हुए 13वें संसदीय चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की प्रचंड जीत के बाद, तारिक रहमान ने 17 फरवरी को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। लेकिन सत्ता की बागडोर संभालने के साथ ही ढाका के गलियारों में एक सवाल सबसे ऊपर है— नए प्रधानमंत्री का आधिकारिक निवास क्या होगा?

‘गणभवन’ अब इतिहास, ‘जमुना’ की तैयारी तेज

जुलाई 2024 की क्रांति के बाद, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के आधिकारिक आवास ‘गणभवन’ को ‘जुलाई क्रांति स्मारक संग्रहालय’ में तब्दील कर दिया गया है। ऐसे में हाउसिंग एंड पब्लिक वर्क्स मिनिस्ट्री ने राज्य अतिथि गृह ‘जमुना’ को प्रधानमंत्री के संभावित निवास के तौर पर सजाया है।

  • विरासत: डॉ. मुहम्मद यूनुस ने भी अंतरिम सरकार के दौरान यहीं से कार्यभार संभाला था।

  • तैयारी: मंत्रालय ने सुरक्षा और रिनोवेशन का काम लगभग पूरा कर लिया है।

गुलशन या हेयर रोड: दिल और सुरक्षा के बीच कशमकश

वर्तमान में तारिक रहमान अपनी मां खालिदा जिया के घर ‘फिरोजा’ के बगल में, मकान नंबर 196 (गुलशन) में रह रहे हैं।

चुनौती: हालांकि गुलशन से उनका भावनात्मक जुड़ाव है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां वहां ‘थ्री-लेयर’ सिक्योरिटी और ट्रैफिक जाम की समस्याओं को लेकर चिंतित हैं। विशेषज्ञों की राय है कि हेयर रोड या मिंटो रोड का वीवीआईपी इलाका सुरक्षा और सचिवालय से निकटता के लिहाज से अधिक मुफीद है।

संसद परिसर का प्रस्ताव क्यों हुआ रद?

दिसंबर में एक प्रस्ताव आया था कि संसद भवन (जातीय संसद) परिसर में स्पीकर और डिप्टी स्पीकर के आवासों को मिलाकर पीएम निवास बनाया जाए। लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञों ने इसे ‘संसदीय प्रोटोकॉल’ का उल्लंघन और सुरक्षा जोखिम बताते हुए खारिज कर दिया।

विपक्षी खेमे में हलचल: सुविधाओं से दूरी

दो दशकों बाद हेयर रोड पर बिल्डिंग नंबर 29 को विपक्षी नेता के लिए तैयार किया गया है। चुनाव में 68 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी दल बनी जमात-ए-इस्लामी के नेताओं ने सरकारी सुविधाओं से दूरी बनाने का संकेत दिया है, जो भविष्य की राजनीति के लिए एक नया संकेत है।

जनता की उम्मीदें

1973 में शेख मुजीबुर रहमान द्वारा बनाए गए ‘गणभवन’ (जनता का घर) का स्वरूप बदलने के बाद, अब बांग्लादेश के नागरिक यह देखने को उत्सुक हैं कि नई सरकार ‘सादगी’ और ‘सुरक्षा’ के बीच कैसा संतुलन बिठाती है।

अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को लेना है, लेकिन इतना साफ है कि इस बार सत्ता का केंद्र केवल एक इमारत नहीं, बल्कि जवाबदेही का प्रतीक होगा।

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