मुंबई. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बॉलीवुड फिल्ममेकर विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को बड़ी राहत देते हुए उन्हें जमानत दे दी है। ₹30 करोड़ की धोखाधड़ी और ‘क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट’ के आरोप में दोनों पिछले दो महीनों से उदयपुर जेल में बंद थे।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए भट्ट दंपति को तुरंत रिहा करने का आदेश जारी किया। शीर्ष अदालत ने उदयपुर के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (CJM) को निर्देश दिया है कि वे उचित नियम और शर्तें निर्धारित कर जमानत की प्रक्रिया को पूरा करें।
क्या है पूरा मामला?
विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी पर एक फिल्म प्रोजेक्ट के नाम पर लिए गए फंड के दुरुपयोग का आरोप है। शिकायत के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
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फंड का हेरफेर: आरोप है कि फिल्म निर्माण के लिए दिए गए ₹30 करोड़ को निजी कार्यों में इस्तेमाल किया गया।
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फर्जी बिलिंग: शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि भट्ट परिवार ने अलग-अलग नामों से फर्जी बिल तैयार कर पैसे ट्रांसफर करवाए।
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गिरफ्तारी: राजस्थान पुलिस ने इस मामले में 7 दिसंबर, 2025 को विक्रम भट्ट, उनकी पत्नी, उनके मैनेजर महबूब अंसारी और एक स्थानीय सहयोगी दिनेश कटारिया को मुंबई से गिरफ्तार किया था।
हाई कोर्ट से झटका, सुप्रीम कोर्ट से राहत
इससे पहले, 31 जनवरी को राजस्थान हाई कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि आरोपों की प्रकृति गंभीर है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अब उन्हें राहत देते हुए जेल से बाहर आने का रास्ता साफ कर दिया है।
विशेष नोट: भट्ट दंपति के साथ गिरफ्तार हुए उनके मैनेजर और अन्य सहयोगियों की कानूनी स्थिति पर अभी स्थिति स्पष्ट होना बाकी है, लेकिन मुख्य आरोपियों की रिहाई फिल्म जगत में चर्चा का विषय बनी हुई है।
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