अमेरिका का बड़ा कदम: वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट ने भारत से 25% टैरिफ हटाने के दिए संकेत, जानें भारतीय बाजार पर असर

वाशिंगटन. जनवरी 2026 के ताजा घटनाक्रमों के अनुसार, अमेरिकी वित्त मंत्री (Treasury Secretary) स्कॉट बेसेन्ट (Scott Bessent) ने दावोस में आयोजित ‘वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम’ के दौरान भारत पर लगे भारी आयात शुल्क (Tariffs) को कम करने के स्पष्ट संकेत दिए हैं। यह कदम भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में जमी बर्फ के पिघलने का पहला बड़ा संकेत माना जा रहा है।

1. मुख्य समाचार: 25% टैरिफ हटाने का प्रस्ताव

अमेरिकी प्रशासन ने संकेत दिया है कि वह भारत पर लगाए गए कुल 50% टैरिफ में से 25% दंडात्मक टैरिफ (Punitive Tariff) को वापस लेने पर विचार कर रहा है।

  • पृष्ठभूमि: अगस्त 2025 में ट्रंप प्रशासन ने भारत पर कुल 50% शुल्क लगाया था। इसमें 25% ‘पारस्परिक टैरिफ’ था और अतिरिक्त 25% दंड के रूप में लगाया गया था, क्योंकि भारत रूस से कच्चा तेल खरीद रहा था।

  • बेसेन्ट का बयान: स्कॉट बेसेन्ट ने कहा कि यह 25% दंडात्मक टैरिफ एक “शानदार सफलता” रहा है क्योंकि इसके दबाव में भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी तेल की खरीद में भारी कटौती की है। उन्होंने कहा, “अब इन शुल्कों को हटाने का एक रास्ता (Path) दिखाई दे रहा है।”

2. टैरिफ हटाने के पीछे के प्रमुख कारण

अमेरिकी वित्त मंत्री के इस नरम रुख के पीछे कई रणनीतिक कारण हैं:

  • रूसी तेल आयात में गिरावट: दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 के आंकड़ों के अनुसार, भारत द्वारा रूसी तेल का आयात पिछले दो वर्षों के न्यूनतम स्तर पर आ गया है। रिलायंस और अन्य बड़ी रिफाइनरियों ने अपना रुख मध्य-पूर्व और ब्राजील की ओर कर लिया है।

  • यूरोपीय संघ (EU) का दबाव: बेसेन्ट ने उल्लेख किया कि यूरोपीय देश भारत के साथ एक बड़ा व्यापार समझौता (FTA) करने जा रहे हैं। अमेरिका नहीं चाहता कि भारत पूरी तरह से यूरोपीय बाजार की ओर झुक जाए।

  • मोदी-ट्रंप व्यक्तिगत संबंध: राष्ट्रपति ट्रंप ने भी हाल ही में पीएम मोदी को एक “शानदार व्यक्ति” बताते हुए संकेत दिया था कि दोनों देश एक “बेहतरीन डील” की ओर बढ़ रहे हैं।

3. भारतीय अर्थव्यवस्था पर संभावित असर

यदि यह 25% टैरिफ हटता है, तो भारतीय निर्यातकों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं होगा:

क्षेत्र (Sector) प्रभाव
IT और सेवाएं अमेरिका में भारतीय आईटी सेवाओं की लागत कम होगी, जिससे मुनाफा बढ़ेगा।
कपड़ा और फार्मा भारतीय गारमेंट्स और दवाओं के लिए अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा करना आसान होगा।
स्टील और एल्युमीनियम निर्यात पर लगने वाले भारी खर्च में कमी आएगी।
शेयर बाजार इस खबर के बाद ऑटो और एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड शेयरों में सकारात्मक हलचल देखी जा रही है।

4. आगे की चुनौतियां: ‘500% टैरिफ’ का डर?

यद्यपि बेसेन्ट ने नरमी के संकेत दिए हैं, लेकिन एक खतरा अभी भी मंडरा रहा है:

  • नया बिल: अमेरिकी सीनेट में एक ऐसा बिल पेश किया गया है जो रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखता है।

  • भारत का पक्ष: भारत ने हमेशा “इंडिया फर्स्ट” ऊर्जा नीति का समर्थन किया है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए बाजार की स्थितियों के आधार पर निर्णय लेता रहेगा।

स्कॉट बेसेन्ट का बयान भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत है। यह दर्शाता है कि अमेरिका भारत को एक रणनीतिक साझेदार के रूप में खोना नहीं चाहता। हालांकि, 25% टैरिफ हटना केवल पहला कदम होगा; पूर्ण व्यापार सामान्यीकरण के लिए अभी और वार्ताओं की आवश्यकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *