पाकिस्तान का संकट: ईरान से ‘इस्लामिक भाईचारा’ निभाए या अमेरिका से ‘डॉलर’ बचाए?

इस्लामाबाद. जनवरी 2026 में अमेरिका और ईरान के बीच गहराते तनाव ने पाकिस्तान को एक ऐसी कगार पर खड़ा कर दिया है जहाँ उसे अपने ‘इस्लामिक भाईचारे’ और ‘अमेरिकी डॉलर’ (आर्थिक अस्तित्व) के बीच चुनाव करना पड़ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जनवरी 2026 में यह स्पष्ट कर दिया है कि जो भी देश ईरान के साथ व्यापार जारी रखेगा, उसे अमेरिका के साथ व्यापार करने पर 25% अतिरिक्त टैरिफ देना होगा।

  • पाकिस्तान के लिए झटका: कंगाली की कगार पर खड़ा पाकिस्तान अपने निर्यात (Exports) के लिए अमेरिकी बाजार पर निर्भर है। इस टैरिफ का सीधा मतलब है पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था की कमर टूटना।

2. ‘इस्लाम’ बनाम ‘डॉलर’ का संघर्ष

पाकिस्तान खुद को दुनिया की एकमात्र ‘इस्लामिक परमाणु शक्ति’ कहता है और ईरान को अपना भाई बताता है। लेकिन हकीकत कुछ और है:

  • ईरान-पाकिस्तान गैस पाइपलाइन: अमेरिका के भारी दबाव और प्रतिबंधों के डर से पाकिस्तान ने इस दशकों पुरानी परियोजना को ठंडे बस्ते में (Shelve) डालने का संकेत दिया है।

  • सैन्य अड्डों का सवाल: चर्चा है कि अमेरिका ईरान पर निगरानी या कार्रवाई के लिए पाकिस्तान से हवाई क्षेत्र (Airspace) या सैन्य अड्डों की मांग कर सकता है। अगर जनरल आसिम मुनीर ऐसा करते हैं, तो उन्हें घरेलू स्तर पर ‘इस्लाम विरोधी’ होने के भारी जन-आक्रोश का सामना करना पड़ेगा।

3. पाकिस्तान की तीन बड़ी चुनौतियां

चुनौती प्रभाव
आर्थिक मजबूरी IMF बेलआउट और अमेरिकी मदद के बिना पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था ढह जाएगी।
आंतरिक अशांति पाकिस्तान में शिया-सुन्नी आबादी और कट्टरपंथी संगठन ईरान पर हमले में अमेरिका का साथ देने पर सड़कों पर उतर सकते हैं।
सीमा सुरक्षा ईरान के साथ 900 किमी लंबी सीमा है। ईरान के अस्थिर होने से बलूचिस्तान में उग्रवाद और शरणार्थियों का संकट बढ़ेगा।

 

यह भी पढ़ें : 1963 की गणतंत्र दिवस परेड में RSS की भागीदारी: नेहरू के निमंत्रण की पूरी कहानी

4. राजनयिक ‘डबल गेम’ की सीमा

अब तक पाकिस्तान अमेरिका और चीन/ईरान के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता रहा है, लेकिन 2026 की भू-राजनीति में ट्रंप प्रशासन ‘न्यूट्रल’ रहने की अनुमति नहीं दे रहा है। या तो आप अमेरिका के साथ हैं, या उसके खिलाफ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *