BMC चुनाव एग्जिट पोल: मुंबई में बीजेपी गठबंधन की सुनामी, ठाकरे भाइयों को बड़ा झटका!

मुंबई. BMC चुनाव 2026 के एग्जिट पोल के नतीजे आ चुके हैं। आंकड़ों के मुताबिक, इस बार मुंबई की सियासत में बड़ा उलटफेर होने के संकेत मिल रहे हैं। देश की सबसे अमीर नगर पालिका पर पिछले तीन दशकों से चला आ रहा ठाकरे परिवार का वर्चस्व खतरे में नजर आ रहा है। मुंबई की सत्ता का ‘सेमीफाइनल’ कहे जाने वाले बीएमसी चुनाव के एग्जिट पोल ने महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल ला दिया है। 15 जनवरी को मतदान खत्म होने के बाद आए विभिन्न सर्वेक्षणों (Axis My India, JVC, प्रजा पोल) के आंकड़े इशारा कर रहे हैं कि मुंबईकर इस बार ‘परिवर्तन’ के मूड में हैं।

एग्जिट पोल के मुख्य आंकड़े: कौन कहाँ खड़ा है?

बीएमसी के कुल 227 वार्डों में बहुमत का आंकड़ा 114 है।

पोलिंग एजेंसी महायुति (BJP + शिंदे सेना) ठाकरे गठबंधन (UBT + MNS + NCP-SP) कांग्रेस + अन्य
Axis My India 131 – 151 58 – 68 12 – 16
JVC Poll 138 59 23
प्रजा पोल 146 53 15

1. महायुति की बढ़त: फडणवीस-शिंदे की जोड़ी का कमाल?

एग्जिट पोल के मुताबिक, बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना को स्पष्ट बहुमत मिलता दिख रहा है।

  • रणनीति: बीजेपी ने 137 और शिंदे सेना ने 90 सीटों पर चुनाव लड़ा।

  • वोट शेयर: महायुति को लगभग 42% वोट मिलने का अनुमान है। विकास और ‘डबल इंजन’ सरकार के नैरेटिव ने मध्यमवर्गीय और गैर-मराठी वोटरों को अपनी ओर खींचा है।

2. ठाकरे बनाम ठाकरे: क्या एकजुटता का दांव फेल हुआ?

करीब 20 साल बाद उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक साथ आए थे। उन्होंने ‘मराठी अस्मिता’ और ‘मुंबई बचाओ’ के मुद्दे पर चुनाव लड़ा, लेकिन एग्जिट पोल बताते हैं कि यह जादू काम नहीं कर पाया।

  • मराठी वोट बैंक में सेंध: शिंदे गुट और राज ठाकरे के बीच मराठी वोटों का बिखराव उद्धव ठाकरे के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित हुआ।

  • सीटों का नुकसान: जो शिवसेना कभी अकेले 80-90 सीटें लाती थी, वह अब गठबंधन के साथ भी 60-70 के बीच सिमटती दिख रही है।

3. राज ठाकरे की भूमिका: ‘किंगमेकर’ या ‘वोट कटर’?

राज ठाकरे (MNS) के लिए यह चुनाव अस्तित्व की लड़ाई थी। अगर एग्जिट पोल सही साबित होते हैं, तो यह स्पष्ट है कि राज ठाकरे का ‘मराठी मानुष’ कार्ड अब उतना प्रभावी नहीं रहा, या फिर इसका सीधा फायदा बीजेपी को मिला है।

16 जनवरी का इंतजार

हालांकि ये सिर्फ अनुमान हैं, लेकिन यदि नतीजे इसी दिशा में रहे, तो 1985 के बाद यह पहली बार होगा जब बीएमसी से ठाकरे परिवार की सत्ता पूरी तरह बाहर होगी। वास्तविक स्थिति आज यानी 16 जनवरी को ही स्पष्ट हो जाएगी।

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