पूर्वोत्तर भारत में भूकंप के तेज झटके: असम और त्रिपुरा की धरती कांपी, घरों से बाहर निकले लोग

गुवाहाटी. नए साल के पहले सप्ताह में ही पूर्वोत्तर भारत की धरती एक बार फिर भूकंप के झटकों से हिल गई है। सोमवार तड़के असम के मोरीगांव और त्रिपुरा के गोमती जिले में मध्यम तीव्रता के भूकंप दर्ज किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, असम में आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5.1 मापी गई है।

भूकंप का समय और केंद्र

  • असम: सोमवार सुबह करीब 04:17 बजे मध्यम तीव्रता के झटके महसूस हुए। इसका केंद्र असम के मोरीगांव जिले में जमीन से 50 किलोमीटर की गहराई में था।

  • त्रिपुरा: इससे कुछ समय पहले तड़के 03:33 बजे त्रिपुरा के गोमती जिले में भी 3.9 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसका केंद्र जमीन से 54 किलोमीटर नीचे दर्ज किया गया।

इन राज्यों और देशों में महसूस हुई कंपन

भारतीय राज्य: असम के अलावा मेघालय (शिलांग), अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में भी कंपन महसूस की गई।

पड़ोसी देश: भूकंप के झटके पड़ोसी देश भूटान, बांग्लादेश, म्यांमार, नेपाल और चीन के सीमावर्ती इलाकों में भी महसूस किए गए।

जान-माल के नुकसान की स्थिति

प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, फिलहाल किसी भी तरह के जान-माल के बड़े नुकसान या किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। हालांकि, तड़के आए इन झटकों के कारण लोग गहरी नींद से जाग गए और दहशत में अपने घरों से बाहर निकल आए। स्थानीय प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और संवेदनशील इलाकों से जानकारी जुटाई जा रही है।

पूर्वोत्तर भारत: भूकंपीय संवेदनशीलता का केंद्र

ज़ोन V से अब ज़ोन VI की ओर (नया अपडेट)

पहले पूरे पूर्वोत्तर भारत को ज़ोन V (सबसे अधिक जोखिम वाला क्षेत्र) में रखा गया था। हालांकि, BIS के नए ‘अर्थक्वेक डिजाइन कोड (IS 1893:2025)’ के अनुसार, अब हिमालयी बेल्ट और पूर्वोत्तर के कई हिस्सों को एक नई श्रेणी ‘ज़ोन VI’ में वर्गीकृत किया गया है। यह श्रेणी अत्यधिक विनाशकारी भूकंपों (तीव्रता 8.0 या उससे अधिक) की आशंका वाले क्षेत्रों के लिए बनाई गई है।

भौगोलिक और टेक्टोनिक कारण

प्लेट्स का टकराव: यहाँ इंडियन प्लेट, यूरेशियन प्लेट और बर्मी प्लेट का मिलन होता है। इंडियन प्लेट उत्तर की ओर बढ़ रही है और यूरेशियन प्लेट से टकरा रही है, जिससे भारी ऊर्जा का निर्माण होता है।

एक्टिव फॉल्ट लाइन्स: इस क्षेत्र में कई सक्रिय फॉल्ट्स (जैसे कोपिली फॉल्ट, थ्रस्ट लाइन्स) मौजूद हैं, जो समय-समय पर हिलते रहते हैं।

हिमालयी बनावट: यह क्षेत्र युवा और कच्चे पहाड़ों से बना है, जो टेक्टोनिक हलचलों के प्रति बहुत संवेदनशील है।

सबसे अधिक जोखिम वाले क्षेत्र

पूर्वोत्तर के कुछ प्रमुख शहर और इलाके जो उच्च जोखिम सूची में हैं:

| राज्य | अत्यधिक संवेदनशील शहर/इलाके |

| :— | :— |

| असम | गुवाहाटी, मोरीगांव, तेजपुर, सादिया (ब्रह्मपुत्र घाटी)। |

| मेघालय | शिलांग और जयंतिया हिल्स (यहाँ का ‘ओल्डम फॉल्ट’ बहुत खतरनाक माना जाता है)। |

| नागालैंड | कोहिमा और सीमावर्ती पर्वतीय क्षेत्र। |

| मणिपुर | इम्फाल (यहाँ 2016 में बड़ा भूकंप आ चुका है)। |

| अरुणाचल | लगभग पूरा राज्य हिमालयन आर्क (Zone VI) के अंतर्गत आता है। |

मिट्टी की प्रकृति और ‘लिक्विफैक्शन’ का खतरा

ब्रह्मपुत्र घाटी की मिट्टी जलोढ़ (Alluvial) है। भूकंप के दौरान ऐसी मिट्टी ‘लिक्विफैक्शन’ (मिट्टी का तरल जैसा व्यवहार करना) का शिकार हो सकती है, जिससे इमारतें धंसने का खतरा बढ़ जाता है।

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