प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के करीबी इजरायल के रणनीतिक मामलों के मंत्री रॉन डर्मर ने दिया इस्तीफा

येरुशुलम. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खास माने जाने वाले, इजरायल के रणनीतिक मामलों के मंत्री रॉन डर्मर ने मंगलवार को इस्तीफा दे दिया है. डर्मर गाजा युद्ध के दौरान चल रही वार्ताओं में अहम भूमिका निभा रहे थे और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बेहद करीब थे.

इजरायली मीडिया में हफ्तों से चल रही अटकलों के बाद आखिरकार आज उनका इस्तीफा आ गया है. डर्मर ने 2022 के अंत में यह पद संभाला था, इससे पहले वह वाशिंगटन में इजरायल के राजदूत रह चुके हैं. डर्मर ने नेतन्याहू को लिखे दो पन्नों के इस्तीफा पत्र में कहा, “मैं आपको सूचित करना चाहता हूं कि मैंने रणनीतिक मामलों के मंत्री के पद से इस्तीफा देने का फैसला किया है.”

हालांकि उनके इस्तीफा पर प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है. लेकिन पत्र मीडिया के सामने जारी कर दिया गया है.

परिवार के किया था वादा

अमेरिका में जन्मे डर्मर ने अपने इस्तीफा पत्र में लिखा कि जब उन्होंने दिसंबर 2022 में मंत्री पद की शपथ ली थी, तब उन्होंने अपने परिवार से दो साल से अधिक नहीं सेवा देने का वादा किया था. हालांकि, दो बार उन्होंने अपने परिवार की इजाजत से अपना कार्यकाल बढ़ाया.

उन्होंने लिखा कि पहली बार जून में ईरान की सैन्य परमाणु क्षमता के खतरनाक खतरे को दूर करने के लिए नेतन्याहू के साथ काम करने के लिए कार्यकाल को बढ़ाया गया और दूसरी बार अक्टूबर में गाजा में युद्धविराम और वहां बंधक बनाए गए इजरायलियों की रिहाई के लिए वार्ता करने के लिए.

क्या होगा डर्मर का भविष्य?

डर्मर ने पत्र में लिखा, “भविष्य में मैं क्या करूंगा, यह मैं नहीं जानता, लेकिन एक बात मैं निश्चित रूप से जानता हूं. मैं जो कुछ भी करूंगा, यहूदी लोगों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए अपना योगदान देता रहूंगा.”

डर्मर नेतन्याहू के सबसे भरोसेमंद सलाहकारों में से एक थे. उन्होंने अक्टूबर की युद्धविराम वार्ता में तत्कालीन ट्रंप प्रशासन और अरब देशों दोनों के साथ बातचीत की थी.

डर्मर 2013-2021 तक वाशिंगटन में इजरायल के राजदूत रहे। उनका कार्यकाल रिपब्लिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल (2017-2021) के साथ ओवरलैप हुआ। कई डेमोक्रेट्स का मानना था कि डर्मर ने अपने वाशिंगटन कार्यकाल के दौरान रिपब्लिकन पार्टी के बहुत करीब हो गए थे, जिससे इजरायल के पिछले दूतों द्वारा विकसित द्विदलीय संबंधों को नुकसान पहुंचा था.

साभार : टीवी9 भारतवर्ष

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