कांग्रेस के पूर्व केंद्रीय मंत्री शकील अहमद ने पार्टी छोड़ी, दूसरी पार्टी में जाने की संभावना से किया इनकार

पटना. बिहार में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को तगड़ा झटका लगा है. पूर्व केंद्रीय मंत्री और बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष रहे शकील अहमद ने पार्टी छोड़ दी है. एक पत्र में शकील अहमद ने लिखा कि मेरे 16 अप्रैल, 2023 के पत्र का स्मरण करें, जिसके द्वारा मैंने पार्टी को सूचित किया था कि मैं अब भविष्य में कभी चुनाव नहीं लडूंगा. अभी हाल ही में मैंने यह घोषणा भी कर दिया था कि मेरे तीनों पुत्र कनाडा में रहते हैं और उनमें से किसी की भी राजनीति में शामिल होने में कोई रुचि नहीं है, इसलिए वह भी चुनाव नहीं लड़ेंगे. लेकिन मैं फिर भी जीवन भर कांग्रेस में बना रहूंगा.परन्तु अध्यक्ष महोदय यह अब संभव नहीं लगता है.

उन्होंने लिखा कि बहुत ही दुखी मन से मैंने कांग्रेस पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा देने का फैसला लिया है. अहमद ने लिखा कि पार्टी की सदस्यता से अलग होने का यह मतलब नहीं है कि मैं किसी दूसरी पार्टी या दल में शामिल हो रहा हूँ. मेरा किसी दूसरी पार्टी में शामिल होने का कोई इरादा नहीं है. अपने पूर्वजों की तरह मुझे भी कांग्रेस की नीतियों और सिद्धांतों में अटूट विश्वास है और मैं जीवन भर कांग्रेस की नीतियों और सिद्धांतों का शुभचिंतक और समर्थक बना रहूंगा तथा मेरे जीवन का अंतिम वोट भी कांग्रेस के पक्ष में ही गिरेगा.

मैं खुद पांच बार का विधायक- शकील अहमद

अहमद ने लिखा कि आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि मेरे दादा स्व० अहमद गफूर 1937 में कांग्रेस के विधायक चुने गये थे. 1948 में उनकी मृत्यु के बाद मेरे पिता शकूर अहमद 1952 से 1977 के बीच पाँच बार कांग्रेस पार्टी के टिकट पर विधायक चुने गये और अलग-अलग पदों पर रहे. 1981 में मेरे पिता के स्वर्गवास होने के बाद 1985 के बाद स्वयं मैं भी पांच बार कांग्रेस का विधायक और सांसद चुना जा चुका हूँ.

अहमद ने लिखा कि पार्टी की सदस्यता त्यागने का फैसला तो मैंने पहले ही कर लिया था परन्तु इसकी घोषणा आज मतदान समाप्त होने के बाद कर रहा हूँ, क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि मतदान से पहले कोई गलत संदेश जाये और मेरी वजह से पार्टी को पाँच वोट का भी नुकसान हो.

उन्होंने लिखा कि अस्वस्थ रहने के कारण में प्रचार तो नहीं कर सका मगर उम्मीद है कि इस बार कांग्रेस की सीटें भी बढ़ेगी और हमारे गठबंधन की एक मजबूत सरकार बनेगी. अंत में एक बार फिर कहूंगा कि मेरा मतभेद वर्तमान में पार्टी की सत्ता में बैठे कुछ व्यक्तियों से हो सकता है, मगर पार्टी की नीतियों और सिद्धांतों पर मुझे अटूट विश्वास है. कृप्या मेरे इस पत्र को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा माना जाये.

साभार : एबीपी न्यूज

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