चीन में आयोजित किया जायेगा अगला एशिया-प्रशांत सहयोग शिखर सम्मेलन

बीजिंग. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने घोषणा की कि वर्ष 2026 का एपीईसी शिखर सम्मेलन चीन के शेनझेन शहर में आयोजित किया जाएगा। इस बैठक में एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 21 देशों के नेता शामिल होंगे। दक्षिण कोरिया के ग्योंगजू में संपन्न इस साल की बैठक के समापन सत्र में शी ने यह एलान किया। उन्होंने कहा कि शेनझेन, जो कभी एक छोटा मछली पकड़ने वाला गांव था, आज आधुनिक अंतरराष्ट्रीय महानगर बन चुका है। यह चीन के खुलेपन और विकास की कहानी का प्रतीक है। आने वाले साल में हम सब इसी शहर में एशिया-प्रशांत क्षेत्र के विकास का नया अध्याय लिखेंगे।

ट्रंप-शी बैठक बनी रही चर्चा का केंद्र

इस साल के एपीईसी सम्मेलन में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरीं। दोनों नेताओं के बीच टैरिफ और दुर्लभ खनिजों के व्यापार को लेकर नई सहमति बनी। ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिका चीन पर लगाई गई फेंटानिल टैरिफ को 20% से घटाकर 10% करेगा।
इसके बदले चीन ने अमेरिका से सोयाबीन और सेमीकंडक्टर चिप्स के आयात को मंजूरी दी और दुर्लभ खनिजों के निर्यात नियंत्रण को हटाने पर सहमति जताई। ट्रंप ने कहा कि वह अप्रैल 2026 में चीन का दौरा करेंगे, जबकि शी जिनपिंग उसके बाद अमेरिका की यात्रा करेंगे। संभावना जताई जा रही है कि ट्रंप भी शेनझेन शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे।

क्षेत्रीय सहयोग और तकनीकी विकास पर जोर

शी जिनपिंग ने अपने संबोधन में कहा एशिया-प्रशांत देशों को पारस्परिक सहयोग को और गहरा करना चाहिए, नई तकनीकों में खुला नवाचार अपनाना चाहिए और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास को मानवता के हित में दिशा देनी चाहिए। उन्होंने विकसित देशों से विकासशील देशों को वित्तीय, तकनीकी और क्षमता निर्माण में सहयोग देने की अपील की। शी ने कहा कि एपीईसी की असली ताकत उसकी एकजुटता और साझा दृष्टिकोण में निहित है।

चीन के लिए शेनझेन क्यों है खास

शेनझेन चीन की आर्थिक क्रांति का केंद्र माना जाता है। 1980 के दशक में यह शहर चीन के पहले आर्थिक विशेष क्षेत्र के रूप में उभरा था। आज यहां तकनीकी, विनिर्माण और समुद्री व्यापार का मजबूत नेटवर्क है, जो इसे एपीईसी जैसे वैश्विक सम्मेलन की मेजबानी के लिए आदर्श स्थान बनाता है।
साभार : अमर उजाला
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