रूस में जनसंख्या संकट से निपटने के लिए पुतिन सरकार दे रही है अधिक बच्चे पैदा करने पर विशेष सुविधाएं

मास्को. रूस में जन्म दर लगातार गिरने और आबादी तेजी से बूढ़ी होने के कारण गंभीर जनसंख्या संकट पैदा हो गया है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पिछले 25 वर्षों से इस चुनौती का सामना कर रहे हैं और इसे देश के भविष्य के लिए सबसे बड़ा खतरा मानते हैं।

1999 में रूस में जन्मे बच्चों की संख्या रिकार्ड स्तर पर गिर गई थी। आर्थिक सुधारों के चलते 2015 में यह संख्या बढ़कर 19.4 लाख तक पहुंची थी, लेकिन इसके बाद जन्म दर हर साल घटती चली गई। 2024 में सिर्फ 12.2 लाख बच्चों का जन्म हुआ, जो 1999 के न्यूनतम स्तर के बराबर है। फरवरी 2025 में तो जन्म दर पिछले 200 वर्षों की सबसे कम मानी गई है।

रूस में घटती आबादी चिंता का विषय

रूस की कुल आबादी 1990 में 14.76 करोड़ थी, जो अब घटकर 14.61 करोड़ रह गई है। इसमें क्राइमिया की जनसंख्या भी शामिल है, जिसे 2014 में रूस ने अवैध रूप से अपने में मिला लिया था। वहीं 55 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की संख्या 1990 के मुकाबले लगभग 9 प्रतिशत बढ़ गई है, जो आबादी के तेजी से बूढ़े होने का संकेत है।

अधिक बच्चों को जन्म देने के लिए कई योजनाएं शुरू

राष्ट्रपति पुतिन ने अधिक बच्चों को जन्म देने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। इनमें बड़े परिवारों को मुफ्त भोजन, आर्थिक सहायता और 10 या अधिक बच्चे पैदा करने वाली महिलाओं को “हीरो मदर” का पदक देना शामिल है। पुतिन का कहना है कि रूस में बड़े परिवार होना एक परंपरा रही है जिसे फिर से अपनाया जाना चाहिए।

रूस में लगातार गिर रही जन्म दर

विशेषज्ञों का मानना है कि यूक्रेन युद्ध, वित्तीय अनिश्चितता, बड़ी संख्या में युवाओं का देश छोड़ना और विदेशी नागरिकों के प्रवेश पर विरोध जैसी वजहों से जन्म दर गिर रही है। इसके साथ ही सरकार ने गर्भपात और एलजीबीटीक्यू+ अधिकारों के प्रचार पर प्रतिबंध लगाकर तथाकथित “पारंपरिक पारिवारिक मूल्यों” को बढ़ावा देने की कोशिश की है।

विश्लेषकों का कहना है कि सरकार महिलाओं को राष्ट्रवाद और देशभक्ति के नाम पर अधिक बच्चे पैदा करने के लिए प्रेरित कर रही है, जबकि आर्थिक और सामाजिक चुनौतियां उन्हें ऐसा करने से रोक रही हैं। रूस का यह जनसांख्यिकीय संकट आने वाले समय में उसकी अर्थव्यवस्था और वैश्विक रणनीतिक क्षमता पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।

साभार : दैनिक जागरण

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