हरियाणा के आईपीएस पूरन कुमार आत्महत्या मामले में डीजीपी शत्रुजीत कपूर सहित 13 अधिकारीयों पर एफआईआर दर्ज

चंडीगढ़. हरियाणा के 2001 बैच के आईपीएस अधिकारी एडीजीपी वाई पूरण कुमार की मौत मामले में चंडीगढ़ पुलिस ने हरियाणा के डीजीपी शत्रुजीत कपूर समेत 12 से 13 अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज किया है। पूरण कुमार ने अपने सुसाइड नोट में डीजीपी शत्रुजीत कपूर, रोहतक के एसएसपी समेत कुल 13 अधिकारियों के नाम लिखे थे। सुसाइड नोट के आधार पर चंडीगढ़ पुलिस ने अब इन सभी के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। सेक्टर-11 थाना पुलिस ने सुसाइड नोट में लिखे गए अधिकारियों के खिलाफ धारा 108 आरडब्ल्यू 3(5) बीएनएस और 3(1)(आर) पीओए (एससी/एसटी) अधिनियम के अंतर्गत एफआईआर दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि सभी आरोपियों के खिलाफ जांच शुरू कर दी गई है।

इससे पहले सीएम नायब सैनी वीरवार दोपहर में आईपीएस अधिकारी वाई पूरण कुमार की पत्नी आईएएस अमनीत पी कुमार से मिलने चंडीगढ़ सेक्टर-24 स्थित उनके आवास पर पहुंचे थे और उनके पति वाई पूरण कुमार के निधन पर शोक जताया। सैनी करीब 45 मिनट रुके और फिर बिना कुछ कहे रवाना हो गए। सीएम के साथ वरिष्ठ आईएएस राजेश खुल्लर भी थे। आईएएस अमनीत पी कुमार ने साफ कह दिया था कि जब तक आरोपी अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज नहीं होता तब तक वह पति वाई पूरण कुमार का पोस्टमार्टम नहीं करवाएंगे।

वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ लगाए थे गंभीर आरोप

आईपीएस अधिकारी वाई पूरण कुमार के सुसाइड नोट में पुलिस और वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पुलिस को यह भी पता चला है कि सुसाइड नोट में कोई तात्कालिक घटना या निजी झगड़े का जिक्र नहीं है यानी अधिकारी ने अपने अंतिम कदम के पीछे किसी अचानक हुए तनाव या हालिया विवाद को नहीं बताया। घटनास्थल से अधिकारी का सुसाइड नोट जेब में मिला था जबकि घर में उनका लैपटॉप नहीं मिला। एक लैपटॉप उनकी बेटी का बताया गया। पुलिस ने मौके पर सीएफएसएल और फॉरेंसिक टीम के साथ पूरी वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी की है। पुलिस अब सुसाइड नोट की लिखावट, तारीख और नोट में शामिल मामलों की विस्तृत जांच कर रही है।

विभाग और सिस्टम पर कई बार उठाए सवाल

हरियाणा के दिवंगत वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई पूरण कुमार ने अपने करियर के दौरान सरकार, विभाग और सिस्टम पर कई बार सवाल उठाए। उन्होंने खुले तौर पर नियमों, पदोन्नति, पोस्टिंग और भेदभाव को लेकर सरकार, प्रमुख सचिव, चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर शिकायतें दर्ज कराईं। उनकी आत्महत्या के कारणों की जांच में इन मामलों पर सवाल उठ सकते हैं। अभी यह खुलासा होना बाकी है कि सुसाइड नोट में क्या इन मामलों से संबंधित लोगों के नाम भी हैं?
साभार : अमर उजाला

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