मोदी सरकार की कार्रवाई से घबराए नक्सली चाहते हैं सीजफायर

रायपुर. माओवादी संगठन ने शांति वार्ता के लिए अस्थायी रूप से हथियार छोड़ने का निर्णय लिया है। यह कदम संगठन को पिछले एक महीने में हुए बड़े नुकसानों के कारण बढ़ते दबाव का परिणाम माना जा रहा है।

माओवादी प्रवक्ता अभय द्वारा जारी की गई थी विज्ञप्ति

पार्टी के प्रवक्ता अभय द्वारा 15 अगस्त को जारी इस बयान में केंद्र सरकार से एक महीने का औपचारिक संघर्ष-विराम (सीजफायर) घोषित करने और तलाशी अभियानों को रोकने का अनुरोध किया गया है।

माओवादी सरकार के साथ बातचीत के लिए तैयार

विज्ञप्ति में यह भी उल्लेख किया गया है कि माओवादी सरकार के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं, चाहे वह गृह मंत्री या उनके द्वारा नियुक्त प्रतिनिधिमंडल के साथ हो।

माओवादियों ने एक महीने का समय मांगा

हालांकि, माओवादियों ने संगठन के भीतर और जेल में बंद अपने साथियों से सलाह-मशविरा करने के लिए एक महीने का समय मांगा है।

बड़े नक्सलियों की मौत से घबराए

पिछले एक माह में माओवादियों को तीन बड़े नुकसान उठाने पड़े हैं, जिनमें गरियाबंद में बालकृष्ण का मारा जाना, झारखंड में सहदेव का मारा जाना और सुजाता का आत्मसमर्पण शामिल है। इन घटनाओं के कारण संगठन पर दबाव बढ़ गया है, जिससे बाद यह पत्र जारी किया गया है।

साभार : दैनिक जागरण

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