दिव्‍या देशमुख बनी पहली भारतीय महिला विश्व चैंपियन

नई दिल्ली. 19 साल की दिव्या देशमुख ने चेस का FIDE महिला वर्ल्ड कप जीत लिया है। उन्होंने फाइनल में भारत की ही कोनेरू हम्पी को टाईब्रेक राउंड में हराकर ये खिताब जीता। वर्ल्ड चैंपियन बनने के साथ वे भारत की 88वीं ग्रैंडमास्टर बन गई हैं।

दिव्या को मिलेंगे 42 लाख रुपए

FIDE विमेंस वर्ल्ड कप जीतने पर दिव्या को लगभग 42 लाख रुपए मिलेंगे। वहीं वर्ल्ड कप (ओपन सेक्शन) के विजेता को लगभग ₹91 लाख मिलते हैं।

मां ट्रेन में सिखाती थीं चेस

उनके माता-पिता ने बताया कि जब वो टूर्नामेंट के लिए बाहर जाती थीं, तब ट्रेन के डिब्बे में ही मां उन्हें गेम्स सिखाती थीं, पिछले मुकाबलों की समीक्षा कराती थीं। उनके पहले कोच नीलेश जाधव ने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘दिव्या बहुत ही अलग सोच रखती थी। उसके मूव्स बड़े खिलाड़ियों जैसे होते थे। हमने जल्दी समझ लिया कि ये बच्ची साधारण नहीं है।’

वर्ल्‍ड नंबर 1 को हराने पर पीएम ने की तारीफ

दिव्या ने पिछले महीने वर्ल्ड टीम रैपिड और ब्लिट्ज चेस चैंपियनशिप में दुनिया की नंबर-1 चेस प्लेयर हौ यिफान को हराया था। दिव्या की इस अचीवमेंट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई दी है। PM मोदी ने सोशल प्लेटफार्म X पर लिखा-‘लंदन में वर्ल्ड टीम ब्लिट्ज चैंपियनशिप के दूसरे चरण के सेमीफाइनल में दुनिया की नंबर 1 खिलाड़ी होउ यिफान को हराने पर दिव्या देशमुख को बधाई। उनकी सफलता उनके धैर्य और दृढ़ संकल्प को दर्शाती है। यह कई उभरते शतरंज खिलाड़ियों को भी प्रेरित करती है। उनके भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं।’ इस टूर्नामेंट में पहली बार भारत की चार महिला खिलाड़ियों कोनेरू हम्पी, हरिका द्रोणवल्ली, आर. वैशाली और दिव्या देशमुख ने क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई थी। जो भारतीय शतरंज के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि रही।

साभार : दैनिक भास्कर

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