मानहानि केस में मेधा पाटकर गिरफ्तार होने के सात घंटे बाद हुई रिहाई

नई दिल्ली. दिल्ली पुलिस ने सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर को 24 साल पुराने मानहानि के एक मामले में गिरफ्तार किया था। उपराज्यपाल वी के सक्सेना ने यह मामला दर्ज कराया था। गिरफ्तारी के सात घंटे बाद ही पाटकर को रिहा कर दिया गया। अदालत ने पाटकर के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था, क्योंकि उन्होंने परिवीक्षा बांड जमा नहीं किया था। हालांकि, शाम को उन्हें रिहा कर दिया गया।

जमानत बांड भरने के बाद किया गया रिहा

अधिकारियों ने बताया कि मेधा पाटकर को एक लाख रुपये का जमानत बांड भरने के बाद रिहा किया गया। अब वह एक साल तक अदालत की निगरानी में रहेंगी। अगर इस दौरान उनका व्यवहार ठीक नहीं रहा, तो उन्हें पांच महीने की जेल हो सकती है।

सुबह पाटकर को किया गया गिरफ्तार

पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि पुलिस की एक टीम सुबह करीब 9:30 बजे निजामुद्दीन इलाके में पाटकर के घर पहुंची। उन्हें वहां से हिरासत में लिया गया। दक्षिण-पूर्व दिल्ली के डीसीपी रवि कुमार सिंह ने कहा, “हमने एनबीडब्ल्यू (गैर-जमानती वारंट) तामील कर दिया है और मेधा पाटकर को गिरफ्तार कर लिया गया है।”

क्या होती है परिवीक्षा?

यह गिरफ्तारी 8 अप्रैल को हुई थी। अडिशनल सेशन जज विशाल सिंह ने पाटकर को एक साल की परिवीक्षा दी थी। परिवीक्षा का मतलब है कि उन्हें कुछ शर्तों के साथ रिहा किया गया था। अदालत ने कहा था कि उनका अपराध जेल भेजने लायक नहीं है। अदालत ने नर्मदा बचाओ आंदोलन में उनके योगदान और उनकी उपलब्धियों का भी जिक्र किया था।

अदालत के आदेश के अनुसार, पाटकर को 23 अप्रैल तक परिवीक्षा बांड जमा करने का निर्देश दिया गया था। लेकिन, उन्होंने ऐसा नहीं किया। इसलिए, अदालत ने उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया। इसका मतलब है कि पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर सकती थी। मेधा पाटकर एक जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उन्होंने नर्मदा बचाओ आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह आंदोलन नर्मदा नदी पर बन रहे बांधों के खिलाफ था। पाटकर ने गरीबों और वंचितों के अधिकारों के लिए भी काम किया है।

साभार : नवभारत टाइम्स

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