सुवेंदु अधिकारी ने रामनवमी पर पश्चिम बंगाल में रखी राम मंदिर की नींव

कोलकाता. पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने रविवार को रामनवमी के अवसर पर पूर्वी मेदिनीपुर में राम मंदिर की आधारशिला रखी। यह मंदिर नंदीग्राम में बनाया जाएगा। सुवेंदु अधिकारी नंदीग्राम से ही भाजपा विधायक हैं। 2007 में तृणमूल कांग्रेस ने ममता बनर्जी के नेतृत्व में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ नंदीग्राम में ही बड़ा आंदोलन किया था।

सोनाचुरा गांव में रखी आधारशिला

6 जनवरी 2007 को भूमि अधिग्रहण आंदोलन के दौरान सोनाचुरा गांव में गोली लगने से सात लोगों की जान गई थी। मंदिर की नींव भी इसी सोनाचुरा गांव में रखी गई है। भगवा रंग में लिपटे सुवेंदु अधिकारी सोनाचुरा में शहीद मीनार से प्रस्तावित मंदिर स्थल पर पहुंचे। यहां एक बड़ी रामनवमी रैली की अगुवाई की। इस दौरान उनके समर्थकों ने जय श्री राम के नारे लगाए।

रामनवमी जुलूस में पहुंचे प्रदेश अध्यक्ष

बता दें कि अप्रैल में ही बंगाल की सीएम ममता बनर्जी पूर्व मेदिनीपुर जिले के दीघा में जगन्नाथ मंदिर का उद्घाटन करेंगी। उधर, हावड़ा में अंजनी पुत्र सेना के रामनवमी जुलूस में केंद्रीय मंत्री और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सुकांता मजूमदार पहुंचे। हावड़ा में प्रशासन ने सुरक्षा-व्यवस्था कड़ी कर रखी है।

भगवान राम सभी के, सीपीएम व टीएमसी के लोग भी जुलूस में आए

इस बीच, सुकांत मजूमदार ने भाजपा के 45वें स्थापना दिवस पर कोलकाता में पार्टी कार्यालय में पार्टी का झंडा फहराया। इस दौरान मजूमदार ने कहा, “श्री राम सभी के हैं। सीपीएम, टीएमसी को भी रामनवमी जुलूस में भाग लेना चाहिए, उन्हें कौन रोक रहा है?” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भगवान श्री राम का उत्सव राजनीति से परे है। भगवान श्री राम का चुनाव से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि श्री राम भारत के दिल और आत्मा में बसते हैं। भारतीय जनता पार्टी आज अपना 45वां स्थापना दिवस मना रही है। दुनिया की सबसे बड़ी सियासी पार्टी भाजपा की स्थापना 1980 में हुई थी। 2014 के आम चुनाव में भारी जीत के बाद से पार्टी लगातार केंद्र की सत्ता पर बनी हुई है।

साभार : दैनिक जागरण

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

ऑडियो बुक : भारत 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *