अपनों से संपर्क रखो बाजवा जी…कभी पंजाब के मुद्दे भी उठाओ : भगवंत मान

चंडीगढ़. पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा के दावों को खारिज करते हुए उनपर तंज कसा है. सीएम मान ने विधानसभा में कहा, ”उनके अपने नेता उनके संपर्क में नहीं होते और हमारे नेताओं को लेकर बोलते हैं कि कभी 30 संपर्क में हैं, तो कभी 32. बाजवा दो साल से यही बोल रहे हैं. अपनों से संपर्क रखो बाजवा जी…कभी पंजाब के मुद्दे भी उठाओ.” मान ने कहा, ”कांग्रेस वाले पूछते हैं कि दिल्ली के हमारे नेता यहां क्यों आए. कांग्रेस ने अब भूपेश बघेल को लाया है, क्या वो पंजाब के हैं. वो भी तो हारे हैं. इससे पहले हरीश चौधरी और हरीश रावत थे, वो भी तो हारे थे.”

प्रताप सिंह बाजवा का क्या है दावा?

पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रताप सिंह बाजवा ने सोमवार (24 फरवरी) को दावा किया था कि आम आदमी पार्टी के 32 विधायक पाला बदलने के लिए उनके संपर्क में हैं. इसके साथ ही उन्होंने कहा, ‘‘हमने पहले ही कहा था कि कांग्रेस की मंशा प्रदेश सरकार को गिराने का नहीं है. मैं यह एक बार फिर से बोल रहा हूं, 32 विधायक मेरे संपर्क में हैं. न केवल विधायक बल्कि मंत्री भी मेरे संपर्क में हैं . अमन अरोड़ा को भी इसकी जानकारी है.’’ अमन अरोड़ा पंजाब AAP के अध्यक्ष हैं.

केंद्र पर भगवंत मान का निशाना

नेशनल पॉलिसी फ्रेमवर्क ऑन एग्रीकल्चर मार्केटिंग के मसौदे के खिलाफ बोलते हुए मान ने कहा, ”केंद्र सरकार पंजाब के खिलाफ भेदभाव करती है. पंजाब का RDF रोक रखा है. केंद्र ने पहले कहा कि पिछली सरकार में आरडीएफ का मिसयूज हुआ है इसलिए ये बिल विधानसभा में पास करो कि ये पैसा सिर्फ रूरल डेवलपमेंट पर ही खर्च होगा. हमने बिल भी पास कर दिया, मगर आरडीएफ का पैसा अभी तक नहीं आया.” उन्होंने कहा कि हम नेशनल पॉलिसी फ्रेमवर्क ऑन एग्रीकल्चर मार्केटिंग के मसौदे के खिलाफ डटे रहेंगे. इसके बाद विधानसभा में नेशनल पॉलिसी फ्रेमवर्क ऑन एग्रीकल्चर मार्केटिंग के खिलाफ प्रस्ताव पास किया गया. आम आदमी पार्टी का कहना है कि ये मसौदा वापिस लिए गए तीन खेती कानूनों के दोबारा लागू करने का प्रयास है.

साभार : एबीपी न्यूज

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

ऑडियो बुक : भारत 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *