महाराष्ट्र में 5 दिसंबर को सिर्फ मुख्यमंत्री के साथ दो उपमुख्यमंत्री ही लेंगे शपथ

मुंबई. महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे आए भले ही एक सप्ताह बीत गया हो, लेकिन सत्ता गठन को लेकर दुविधा अभी तक बनी हुई है। एकनाथ शिंदे ने मुख्यमंत्री पद से अपना दावा छोड़ दिया है। बीजेपी की ओर से उन्हें उपमुख्यमंत्री पद का ऑफर दिया गया है। शिंदे इस बात पर जोर दे रहे हैं कि अगर उपमुख्यमंत्री का पद देना है तो उसके साथ गृह मंत्री का पद भी दिया जाना चाहिए। बीजेपी गृह मंत्री का पद छोड़ने को तैयार नहीं है। ऐसे में विभागों के बंटवारे की चर्चा रुकी हुई है। बीजेपी ने 5 दिसंबर को मुंबई के आजाद मैदान में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की घोषणा कर अप्रत्यक्ष तौर से शिवसेना पर दबाव बढ़ा दिया है।

5 दिसंबर को सिर्फ मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्री लेंगे शपथ

नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह 5 दिसंबर को होगा। विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए 4 दिसंबर को सुबह 11 बजे बीजेपी की बैठक होगी। इस बैठक के समापन के बाद राज्यपाल के पास सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। एबीपी माझा ने खबर दी है कि 5 दिसंबर को सिर्फ मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्री शपथ लेंगे। 4 दिसंबर की बैठक में मंत्रियों के नाम तय होने पर ही 5 को मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जा सकेगा।

बीजेपी का ही मुख्यमंत्री बनेगा

एकनाथ शिंदे के मुख्यमंत्री पद से अपना दावा छोड़ने के बाद यह साफ हो गया है कि राज्य में एक बार फिर से बीजेपी का ही मुख्यमंत्री बनेगा। पीटीआई ने बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता के हवाले से बताया कि बीजेपी नेतृत्व ने मुख्यमंत्री पद के लिए देवेंद्र फडणवीस के नाम को मंजूरी दे दी है। ऐसे में यह तय माना जा रहा है कि फडणवीस दोबारा आएंगे। यह जिज्ञासा का विषय है कि क्या एकनाथ शिंदे नई कैबिनेट में होंगे और यदि हां तो उनके पास क्या हिसाब-किताब होगा।

कैबिनेट का गणित क्या?

राज्य मंत्रिमंडल में अधिकतम 43 सदस्य हैं। इनमें से 21 मंत्री पद बीजेपी के पास बरकरार रहने की संभावना है। शिवसेना को 12 और एनसीपी को 10 मंत्री मिल सकते हैं। पिछली सरकार में बीजेपी के पास 10 महकमे थे, जबकि शिवसेना और एनसीपी के पास 9-9 विभाग थे। उस समय 15 मंत्री पद खाली थे। करीब सवा साल से ये मंत्री पद नहीं भरे गए हैं।

शिवसेना ने एकनाथ शिंदे को नेता चुना

शिवसेना विधायकों ने एकनाथ शिंदे को विधानमंडल में समूह के नेता के रूप में चुना है, जबकि एनसीपी विधायकों ने अजित पवार को चुना है। लेकिन विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी ने अभी तक विधानमंडल में समूह नेता का चुनाव नहीं किया है। हालांकि इस बात को लेकर उत्सुकता है कि मुख्यमंत्री कौन होगा? इस कारण चर्चाएं उल्टी चल रही हैं। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा चल रही है कि क्या बीजेपी विधायक दल का नेता चुनने में चौंकाने वाली रणनीति अपनाएगी।

साभार : नवभारत टाइम्स

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