पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की सनातन हिंदू पदयात्रा में शामिल हुए कांग्रेस नेता जयवर्धन

भोपाल. पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की सनातन हिंदू पदयात्रा को हर वर्ग का समर्थन मिल रहा है। बीजेपी तो खुलकर बाबा के साथ है। इस बीच मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन सिंह भी हिंदू पदयात्रा के समर्थन में आ गए हैं। वह बाबा बागेश्वर के साथ पहले ही दिन उनकी यात्रा में शामिल हुए हैं। साथ ही खुलकर उन्होंने इस यात्रा का समर्थन किया है। इसके बाद कांग्रेस के अंदर से विरोध के स्वर उठने लगे हैं। कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया जयवर्धन सिंह पर भड़क गए हैं।

विधायक जयवर्धन सिंह यात्रा में हुए शामिल

कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह 21 नवंबर को बागेश्वर धाम पहुंचे और धीरेंद्र शास्त्री से मुलाकात की। जयवर्धन सिंह इस यात्रा में शामिल भी हुए हैं। वह थोड़ी दूर तक बाबा बागेश्वर के साथ चले हैं। उसकी तस्वीरें सामने आई हैं।

कहा- मेरा पूरा समर्थन

जयवर्धन सिंह यात्रा को लेकर भोपाल में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि मैंने पदयात्रा की है। हमारा परिवार सनातनी रहा है और सदैव रहेगा। भागवत गीता में भी जिक्र है कि आत्मा ही परमात्मा है और परमात्मा ही सनातन है। हम सभी सनातनियों से अपील करते हैं कि सनातन पदयात्रा में शामिल हों। वहीं, फूल सिंह बरैया के विरोध पर कहा कि कांग्रेस वो पार्टी है, जिसमें जय श्रीराम और जय भीम भी है। धर्म बिलकुल निजी विषय होता है। सबका अधिकार है कि हम अपने धर्म का पालन करें। वहीं, दिग्विजय सिंह के शामिल होने पर जयवर्धन सिंह ने कहा कि हम दोनों एक ही हैं, वो दिल्ली में हैं। मैं जाऊं या वो जाएं, बात एक ही है।

फूल सिंह बरैया भड़के

धीरेंद्र शास्त्री की इस यात्रा पर कांग्रेस नेता फूल सिंह बरैया ने तंज कसा है। उन्होंने कहा कि बिल्ली से कहा जाए चूहों की रक्षा करो। धीरेंद्र शास्त्री की यात्रा ऐसे ही है। जो हिंदू धर्म में जातियों में विश्वास रखता हो, जातिवाद बढ़ाता हो और वो जातिवाद खत्म करने के लिए निकले। ये तो मजाक है। इसमें कोई दम नहीं है। गौरतलब है कि कथित तौर पर कहा जाता है कि बाबा बागेश्वर बीजेपी के समर्थक हैं। हालांकि उनके दरबार में कांग्रेस नेता जाते रहे हैं। पहली बार दिग्विजय सिंह के बेटे ने उनकी यात्रा का खुलकर समर्थन किया है। उनके पिता को बीजेपी एंटी हिंदू के रूप में प्रचारित करते रहती है। जयवर्धन सिंह से उस यात्रा में शामिल होने के बाद कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

साभार : नवभारत टाइम्स

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *