चौथे चरण के लोकसभा चुनाव के दौरान भी पश्चिम बंगाल में हुई हिंसा

कोलकाता. लोकसभा चुनाव के चौथे चरण में सोमवार को वोटिंग के दौरान पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में हिंसा हुई। संदेशखाली में बीजेपी और टीएमसी कार्यकर्ताओं के भिड़ंत के बाद राज्य के अन्य हिस्सों में दोनों पार्टियों के बीच झड़पें हुईं। बीरभूम के दुर्गापुर में टीएमसी कार्यकर्ताओं पर बीजेपी के स्टॉल तोड़ने पर विवाद हो गया। टीएमसी नेताओं का कहना है कि बीजेपी नेता केंद्रीय बलों के साथ मिलकर वोटिंग को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे थे, जिसका विरोध किया गया। शुरुआती दो घंटों के दौरान सबसे अधिक वोटिंग बहरामपुर में हुई है।

बीजेपी के बूथ एजेंट को भगाने का आरोप

बीजेपी विधायक लक्ष्मण घोरुई ने आरोप लगाया कि टीएमसी के गुंडों ने उनके पोलिंग एजेंटों को दुर्गापुर के टीएन स्कूल स्थित मतदान केंद्र से बाहर निकाल दिया गया। घोरुई ने कहा बूथ संख्या 22 से अल्पना मुखर्जी 22, बूथ संख्या 83 से सोमनाथ मंडल और बूथ संख्या 82 से राहुल साहनी को डरा-धमकाकर भगा दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक अधिकारी की मिलीभगत के कारण टीएमसी के गुंडों ने महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया। इसके अलावा बर्धमान-दुर्गापुर लोकसभा क्षेत्र से बीजेपी कैंडिडेट दिलीप घोष ने भी आरोप लगाया कि टीएमसी के गुंडों ने उनके पोलिंग एजेंटों को मतदान केंद्र में घुसने नहीं दिया। साथ ही, उन्होंने कहा कि टीएमसी कार्यकर्ता लोगों को वोटिंग से भी रोक रहे हैं। इस बीच मुर्शिदाबाद जिले के बहरामपुर लोकसभा क्षेत्र के बरवान में भी टीएमसी और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में झड़प हुई। इस सीट से कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी चुनाव लड़ रहे हैं। अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने वोटिंग प्रभावित करने के लिए सुबह से ही तनाव पैदा करने की कोशिश की। अर्द्धसैनिक बलों के कार्रवाई के बाद वोटिंग सुचारु हुई।

सुबह 9 बजे तक बहरामपुर में सबसे अधिक वोटिंग

निर्वाचन आयोग के अनुसार, सुबह 9 बजे तक सबसे अधिक मतदान बहरामपुर में हुआ, वहां 16.97 प्रतिशत वोटिंग हुई। इसके बाद बोलपुर में 16.46 प्रतिशत, बर्द्धमान-पूर्व में 15.88 प्रतिशत, कृष्णानगर में 15.67 प्रतिशत, राणाघाट में 15.31 प्रतिशत मतदान हुआ। शुरुआती दो घंटों के दौरान बीरभूम में 14.55, बर्धमान-दुर्गापुर में 14.08 और आसनसोल में 13.03 फीसदी मतदान हुआ। बता दें कि पश्चिम बंगाल में टीएमसी और बीजेपी सभी 42 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। लेफ्ट से गठबंधन के बाद कांग्रेस 12 सीटों पर मैदान में है। लेफ्ट पार्टियों ने 30 लोकसभा सीटों पर कैंडिडेट उतारे हैं। 2014 के चुनाव में टीएमसी ने 34 सीटें जीती थीं। कांग्रेस और सीपीआई (एम) के खाते में 2-2 सीटें आईं थीं। कांग्रेस को चार सीटों से संतोष करना पड़ा था। 2019 के चुनाव में बीजेपी ने 18 सीटें जीतकर हैरान कर दिया। पांच साल पहले टीएमसी को 22 और कांग्रेस को 2 सीटें मिली थीं। 2024 के चुनाव में बीजेपी 30 से अधिक सीट जीतने का दावा कर रही है।

साभार : नवभारत टाइम्स

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