मंगलवार, सितंबर 08 2026 | 03:42:31 AM

देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की धूम: मध्यरात्रि 12 बजे शंखध्वनि के साथ हुआ कान्हा का जन्म, भक्ति में सराबोर हुई ब्रजभूमि

Saransh Kanaujia
5 Min Read
मथुरा । अपडेटेड : शनिवार, 5 सितंबर 2026
अधर्म पर धर्म की विजय और निष्काम कर्म का संदेश देने वाले भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव देशभर में अभूतपूर्व श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की मध्यरात्रि में जैसे ही घड़ी की सुइयों ने रात के 12 बजाए, मंदिरों और घरों में शंख, घड़ियाल और घंटियों की गूंज के साथ ‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ का जयघोष गूंज उठा।
भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ ही मथुरा, वृंदावन, काशी से लेकर देश के कोने-कोने में स्थित देवालय दिव्य प्रकाश और भक्तिमय संगीत से जगमगा उठे।

मथुरा-वृंदावन में उमड़ा आस्था का सैलाब, भव्य सजावट ने मोहा मन

भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली मथुरा और उनकी बाल-लीलाओं की पावन भूमि वृंदावन में जन्माष्टमी को लेकर अलौकिक उत्साह देखा गया।
  • श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर: गर्भगृह से लेकर भागवत भवन को लगभग 200 किलोग्राम चांदी, देशी-विदेशी सुगंधित फूलों और आकर्षक रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया था।
  • पंचामृत महाअभिषेक: मध्यरात्रि ठीक 12 बजे कान्हा के प्राकट्य के उपरांत बालगोपाल का दूध, दही, देसी घी, शहद और गंगाजल (पंचामृत) से दिव्य अभिषेक किया गया। इसके बाद उन्हें जरी और रत्नजड़ित विशेष रेशमी पोशाक धारण कराकर आकर्षक श्रृंगार किया गया।
  • लाइव प्रसारण: गर्भगृह के संकरे स्थान को देखते हुए इस बार श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स पर महाअभिषेक का सीधा (LIVE) प्रसारण किया गया, जिससे घर बैठे करोड़ों श्रद्धालुओं ने दर्शन लाभ प्राप्त किए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मथुरा दौरा और सुरक्षा व्यवस्था

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पावन पर्व पर मथुरा पहुंचकर श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर में दर्शन-पूजन किया और प्रदेशवासियों को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं।
लाखों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं के सुगम दर्शन और सुरक्षा के लिए प्रशासन ने व्यापक प्रबंध किए:
  • रूट डायवर्जन: मथुरा-वृंदावन क्षेत्र में भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया।
  • तकनीकी निगरानी: संपूर्ण मेला क्षेत्र की निगरानी सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन से की गई।
  • नागरिक सुविधाएं: श्रद्धालुओं के लिए जगह-जगह मेडिकल कैंप, पेयजल और खोया-पाया सहायता केंद्र स्थापित किए गए।

घरों में सजीं बाल-गोपाल की झांकियां और सांस्कृतिक कार्यक्रम

जन्माष्टमी का यह पावन पर्व केवल मंदिरों तक सीमित नहीं रहा। घरों में श्रद्धालुओं ने उपवास रखकर लड्डू गोपाल के लिए आकर्षक पालने सजाए। छोटे-छोटे बच्चों को राधा और कृष्ण के स्वरूपों में सजाया गया।
विभिन्न सांस्कृतिक मंचों और मंदिरों में ‘माखन चोरी’, ‘बाल लीला’, ‘रासलीला’ और ‘गिरिराज पूजा’ जैसे प्रसंगों का सजीव मंचन हुआ। देर रात तक भक्त ढोल-मंजीरों पर थिरकते नजर आए। पूजन के पश्चात पंचामृत, माखन, मिश्री और पंजीरी का प्रसाद वितरित कर भक्तों ने अपना उपवास खोला।

 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक किस सामग्री से किया जाता है?
उत्तर: जन्माष्टमी पर बाल गोपाल का अभिषेक ‘पंचामृत’ (दूध, दही, देसी घी, शहद और गंगाजल) से किया जाता है। इसके बाद शुद्ध जल से स्नान कराकर नए वस्त्र पहनाए जाते हैं।
Q2: जन्माष्टमी की मध्यरात्रि पूजा का मुख्य समय क्या होता है?
उत्तर: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की मध्यरात्रि 12:00 बजे हुआ था। इसलिए रात 12:00 बजे से लेकर 12:45 बजे तक का समय मुख्य पूजन, अभिषेक और आरती के लिए विशेष माना जाता है।
Q3: मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर विशेष व्यवस्थाएं क्या थीं?
उत्तर: गर्भगृह को चांदी और फूलों से सजाया गया, 1008 कमल के पुष्पों से सहस्रार्चन किया गया और श्रद्धालुओं के लिए गर्भगृह से महाअभिषेक का लाइव प्रसारण किया गया।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख दिए गए समाचार विवरणों और प्रचलित धार्मिक मान्यताओं के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें वर्णित कार्यक्रमों, समय और आयोजनों की प्रशासनिक/स्थानिक जानकारियों में परिस्थिति अनुसार बदलाव संभव है।

Related Post

Share This Article