बस्ती मदरसा फर्जीवाड़ा: जीवित पदाधिकारियों को मृत दिखाकर समिति पर कब्जे का प्रयास, 4 आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका कोर्ट से खारिज

बस्ती। रविवार, 28 जून 2026

उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में स्थित एक मदरसे की प्रबंध समिति पर अवैध रूप से कब्जा करने के लिए रची गई जालसाजी की साजिश में न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। जनपद के नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत मटेरा गांव में स्थित ‘मदरसा अरबिया अहले सुन्नत तालीमुल इस्लाम अशरफिया’ की प्रबंध समिति में फर्जी दस्तावेजों के सहारे बदलाव करने वाले चार नामजद आरोपियों को अदालत से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए चारों अभियुक्तों की अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) याचिका को पूरी तरह निरस्त कर दिया है।

जिन आरोपियों की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज हुई है, उनमें शामिल हैं:

  1. अब्दुल कादिर

  2. अब्दुल सलाम

  3. हुसैन रजा

  4. अब्दुल अजीज

यह पूरा मामला नगर थाने में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 149/2026 से संबंधित है, जिसमें मुख्य आरोपी अब्दुल रब समेत उसके करीबियों पर जालसाजी और धोखाधड़ी के संगीन आरोप हैं।

क्या है पूरा मामला? (जीवित लोगों को कागजों में दिखाया मृत)

अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत के समक्ष रखी गई दलीलों के अनुसार, यह मामला सत्ता के लालच और प्रशासनिक धोखाधड़ी का एक सनसनीखेज उदाहरण है। मुख्य आरोपी अब्दुल रब ने मटेरा स्थित मदरसा अरबिया अहले सुन्नत तालीमुल इस्लाम अशरफिया की प्रबंध समिति पर पूरी तरह से नियंत्रण स्थापित करने के लिए एक खौफनाक साजिश रची।

आरोप है कि मदरसे के मूल और वैध पदाधिकारियों को, जो कि वास्तव में जीवित थे, कागजों और फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से मृत घोषित कर दिया गया। इसके बाद उनके नाम समिति की सूची से जबरन हटा दिए गए। इस अवैध बदलाव को कानूनी रूप देने के लिए:

  • स्थानीय ग्राम प्रधान के फर्जी हस्ताक्षर और नकली मुहर का इस्तेमाल किया गया।

  • एक कूटरचित (Forged) शपथपत्र तैयार कर उसे सहायक रजिस्ट्रार फर्म्स, सोसायटीज एवं चिट्स के कार्यालय में प्रस्तुत किया गया।

  • इसी फर्जी हलफनामे के आधार पर मुख्य आरोपी अब्दुल रब ने अपने ही परिवार के सदस्यों और करीबियों को समिति में नए पदाधिकारी और सदस्य के रूप में शामिल करवा लिया।

बचाव पक्ष की दलीलें और गिरफ्तारी का डर

दूसरी ओर, आरोपियों के वकीलों (बचाव पक्ष) ने अदालत में इन आरोपों को पूरी तरह से नकारने की कोशिश की। बचाव पक्ष की मुख्य दलीलें इस प्रकार थीं:

  • अभियुक्तों के खिलाफ लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह निराधार और मनगढ़ंत हैं।

  • उन्होंने किसी भी प्रकार का फर्जी शपथपत्र या नकली दस्तावेज किसी भी कार्यालय में जमा नहीं किया है।

  • स्थानीय या व्यक्तिगत रंजिश के चलते उन्हें इस झूठे मुकदमे में फंसाया जा रहा है।

  • आरोपियों का कोई पुराना आपराधिक इतिहास (Criminal History) नहीं है और पुलिस द्वारा गिरफ्तारी की आशंका के चलते उन्होंने अदालत से अग्रिम संरक्षण (जमानत) की मांग की थी।

अदालत का फैसला: क्यों खारिज हुई जमानत?

मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पुलिस की केस डायरी, जांच रिपोर्ट और उपलब्ध प्राथमिक साक्ष्यों का बेहद गहराई से अवलोकन किया। कोर्ट ने पाया कि जीवित व्यक्तियों को मृत दिखाकर किसी संस्था की समिति पर कब्जा करना और इसके लिए सरकारी/प्रशासनिक स्तर पर फर्जी मोहर व हस्ताक्षर का उपयोग करना एक अत्यंत गंभीर श्रेणी का अपराध है।

अदालत ने अपने आदेश में यह भी रेखांकित किया कि अग्रिम जमानत की गुहार लगाने वाले चारों आवेदक (अब्दुल कादिर, अब्दुल सलाम, हुसैन रजा और अब्दुल अजीज) मुख्य साजिशकर्ता अब्दुल रब के बेहद करीबी रिश्तेदार हैं। पुलिस की प्रथम दृष्टया (Prima Facie) जांच में इस धोखाधड़ी में उनकी भूमिका संदिग्ध पाई गई है और मामले की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।

सभी कानूनी पहलुओं, साक्ष्यों और अपराध की प्रकृति पर विचार करने के बाद अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपियों को अग्रिम जमानत का लाभ दिए जाने का कोई ठोस या पर्याप्त आधार मौजूद नहीं है। इसी के साथ न्यायालय ने चारों की अर्जियां खारिज कर दीं।

वर्तमान स्थिति: चारों आरोपियों की अग्रिम जमानत निरस्त होने के बाद अब उन पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। नगर थाना पुलिस द्वारा इस पूरे मामले की विवेचना (Investigation) अभी भी तेजी से जारी है, जिसमें कुछ अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

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