मुंबई | गुरुवार, 25 जून 2026
महाराष्ट्र विधानसभा का मानसून सत्र इस समय अपनी सबसे तीखी वैचारिक और राजनीतिक बहस का गवाह बन रहा है। राज्य में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC), तीन तलाक कानून की जमीनी स्थिति और मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत बहुविवाह (Polygamy) की प्रथा को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के साथ-साथ खुद सत्तारूढ़ ‘महायुति’ गठबंधन के भीतर भी गहरी दरारें और गंभीर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।
नासिक से भारतीय जनता पार्टी (BJP) की विधायक देवयानी फरांदे द्वारा लाए गए एक ‘ध्यान आकर्षण प्रस्ताव’ (Calling Attention Motion) के बाद शुरू हुई यह बहस देखते ही देखते एक बड़े सियासी विवाद में बदल गई। इस विवाद के केंद्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP – अजीत पवार गुट) की विधायक सना मलिक का वह बयान है, जिसमें उन्होंने कुरान के प्रावधानों और पाकिस्तान के कानून का संदर्भ दिया था। इस बयान पर भाजपा और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के विधायकों ने विधानसभा के भीतर तीखा पलटवार किया।
विवाद की शुरुआत: देवयानी फरांदे का ध्यान आकर्षण प्रस्ताव और UCC की मांग
इस पूरे विवाद की पटकथा मंगलवार को लिखी गई, जब भाजपा विधायक देवयानी फरांदे ने नासिक जिले में सामने आए तीन तलाक के कुछ मामलों का हवाला देते हुए सदन का ध्यान इस ओर खींचा। फरांदे ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा तीन तलाक को गैर-कानूनी घोषित किए जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर मुस्लिम महिलाओं को मानसिक, आर्थिक और सामाजिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है।
अपने संबोधन के दौरान देवयानी फरांदे ने पड़ोसी देश पाकिस्तान का उदाहरण देते हुए कहा:
“अगर हम 1947 में भारत से अलग हुए पाकिस्तान को देखें, तो वहां भी एक से ज्यादा शादी (बहुविवाह) करने के लिए पहली पत्नी की लिखित अनुमति और एक सरकारी मध्यस्थता परिषद (Arbitration Council) की मंजूरी जरूरी होती है। इसी कड़े नियम के कारण पाकिस्तान में बहुविवाह की दर महज 1 प्रतिशत है। जब वहां पाबंदियां हैं, तो भारत में मुस्लिम महिलाओं को सुरक्षा और समान अधिकार देने के लिए ठोस कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे?”
फरांदे ने पुरजोर मांग की कि उत्तराखंड, गोवा और असम की तर्ज पर महाराष्ट्र सरकार को भी जल्द से जल्द राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए, क्योंकि देश किसी की निजी धार्मिक राय से नहीं बल्कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के संविधान से चलता है।
सना मलिक का तीखा पलटवार और ‘कुरान’ पर दिया बयान जिसने बढ़ाया विवाद
भाजपा विधायक के इस प्रस्ताव और उनके तर्कों का जवाब देने के लिए जब महायुति गठबंधन का ही हिस्सा रही एनसीपी (अजीत पवार गुट) की विधायक सना मलिक खड़ी हुईं, तो सदन का तापमान अचानक बढ़ गया। सना मलिक ने देवयानी फरांदे के ‘पाकिस्तान संदर्भ’ को पकड़ते हुए आक्रामक रुख अपनाया।
सना मलिक ने सदन में कहा:
“आप (देवयानी फरांदे) पाकिस्तान का उदाहरण दे रही हैं, लेकिन पाकिस्तान ने कुछ नया नहीं किया है। उन्होंने सिर्फ वही लागू किया है जो हमारे पवित्र ग्रंथ कुरान में निर्देश दिया गया है। इस्लाम कुरान को मानता है और मुस्लिम पर्सनल लॉ में कुछ विशेष परिस्थितियों में बहुविवाह की अनुमति है। हमारी मांग है कि अगर पाकिस्तान ने कुरान के नियमों को सही तरीके से लागू किया है, तो भारत को भी उसी तरह कुरान के प्रावधानों को लागू करना चाहिए। हम इसकी मांग करते हैं।”
मलिक ने यह भी तर्क दिया कि बहुविवाह की प्रथा सिर्फ मुस्लिम समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य धर्मों के पुरुष भी कई शादियां करते हैं, लेकिन कानून के दायरे में सिर्फ मुस्लिम पुरुषों को ही लाकर निशाना बनाया जाता है। उन्होंने ‘तलाक-ए-बिद्दत’ (एक बार में तीन तलाक) को गैर-इस्लामिक बताते हुए कहा कि ‘तलाक-ए-हसन’ और ‘तलाक-ए-अहसन’ जैसी वैध प्रक्रियाओं का वे भी सम्मान करती हैं।
“देश संविधान से चलेगा, कुरान से नहीं” – भाजपा का कड़ा विरोध
सना मलिक द्वारा भारत में कुरान के नियमों को लागू करने और पाकिस्तान का उदाहरण देने पर भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) के विधायक भड़क गए। भाजपा मंत्री नितेश राणे और विधायक अतुल भातखल्कर ने सदन में खड़े होकर सना मलिक के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई।
अतुल भातखल्कर ने सदन में चिल्लाकर कहा:
“आप हमें सदन के भीतर कुरान पर व्याख्यान मत दीजिए। यह भारत देश है और यह देश पूरी तरह से डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा रचित भारतीय संविधान के सिद्धांतों पर चलेगा, किसी धार्मिक ग्रंथ या कुरान के आधार पर नहीं। सना मलिक शायद भूल रही हैं कि वह एक हिंदू-बहुल लोकतांत्रिक देश की विधानसभा में बैठकर बोल रही हैं, न कि पाकिस्तान की संसद में।”
इस तीखी नोकझोंक के बीच सदन में भारी हंगामा हुआ। विपक्ष के नेताओं जैसे शिवसेना (UBT) के भास्कर जाधव और एनसीपी (शरद पवार गुट) के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटील ने सना मलिक का बचाव करते हुए कहा कि संसदीय परंपरा के अनुसार हर सदस्य को अपनी राय रखने का पूरा अधिकार है, चाहे वह बहुमत की राय से मेल खाती हो या नहीं। वहीं समाजवादी पार्टी (SP) के नेता अबू आजमी ने भी इस पूरी बहस का विरोध करते हुए सरकार पर विकास के मुद्दों से ध्यान भटकाने और मुसलमानों को लक्षित कर ध्रुवीकरण करने का आरोप लगाया।
बढ़ते विवाद पर सना मलिक की सफाई: “बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया”
विधानसभा से लेकर सोशल मीडिया तक जब इस बयान पर चौतरफा घिराव शुरू हुआ, तो विधायक सना मलिक ने मीडिया के सामने आकर अपनी सफाई पेश की। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके बयान का गलत मतलब निकाला गया है।
अपनी सफाई में सना मलिक ने कहा:
-
पाकिस्तान आदर्श नहीं: “मैं या भारत का कोई भी मुसलमान पाकिस्तान को अपना आदर्श नहीं मानता। भारतीय मुसलमानों का पाकिस्तान से कोई वैधानिक या भावनात्मक लेना-देना नहीं है।”
-
फरांदे के संदर्भ का दिया जवाब: “मैंने पाकिस्तान का नाम सिर्फ इसलिए लिया क्योंकि मुझसे पहले भाजपा विधायक देवयानी फरांदे ने पाकिस्तान के कानून का संदर्भ दिया था। मैंने सिर्फ उनके संदर्भ का उत्तर दिया था।”
-
संवैधानिक अधिकारों की दुहाई: “भारतीय संविधान हमें अपने धार्मिक रीति-रिवाजों और पर्सनल लॉ का पालन करने की स्वतंत्रता देता है। हमारा मानना है कि कोई भी नया कानून (जैसे UCC) लाते समय किसी एक विशेष धर्म को निशाना बनाने के बजाय संविधान के मूल ढांचे को ध्यान में रखा जाना चाहिए।”
महाराष्ट्र सरकार का बड़ा कदम: UCC के अध्ययन के लिए बनेगी विशेष कमेटी
इस पूरे हंगामे और वैचारिक टकराव के बीच महाराष्ट्र सरकार ने इस संवेदनशील मुद्दे पर एक बेहद महत्वपूर्ण प्रशासनिक घोषणा की है। चर्चा का उत्तर देते हुए राज्य के गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने सदन को सूचित किया कि सरकार समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर पूरी तरह सकारात्मक और गंभीर है।
सरकार की आधिकारिक घोषणा: गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने घोषणा की कि महाराष्ट्र सरकार राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की संभावनाओं, इसके कानूनी पहलुओं और जनता के फीडबैक का अध्ययन करने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक सदस्यीय विशेष समिति (One-Member Committee) का गठन करने जा रही है।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह कमेटी अपनी विस्तृत रिपोर्ट और सिफारिशें राज्य सरकार को सौंपेगी, जिसके बाद ही महाराष्ट्र में UCC बिल लाने पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य में तीन तलाक विरोधी कानून को बेहद कड़ाई से लागू किया जा रहा है ताकि किसी भी पीड़ित महिला के साथ अन्याय न हो।
निष्कर्ष (Conclusion)
महाराष्ट्र विधानसभा की यह बहस साफ दर्शाती है कि देश में समान नागरिक संहिता (UCC) का मुद्दा कितना संवेदनशील है। जहां एक तरफ भाजपा और उसके सहयोगी दल लैंगिक न्याय (Gender Justice) और ‘एक देश, एक कानून’ के तहत इसे लागू करने के लिए प्रतिबद्ध दिख रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अल्पसंख्यक समुदायों के प्रतिनिधि और विपक्षी दल इसे धार्मिक स्वतंत्रता और पर्सनल लॉ पर सीधे हस्तक्षेप के रूप में देख रहे हैं। अब सभी की निगाहें सरकार द्वारा गठित होने वाली इस सेवानिवृत्त न्यायाधीश की कमेटी पर टिकी हैं कि वह अपनी रिपोर्ट में क्या रूपरेखा तैयार करती है।
