संभल में अतिक्रमण पर सख्त एक्शन: गुन्नौर में सार्वजनिक भूमि पर बनी अवैध मजार और कब्रों पर चला प्रशासन का बुलडोजर

संभल । रविवार, 21 जून 2026

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘जीरो टॉलरेंस’ (zero-tolerance policy) और अवैध अतिक्रमण मुक्त महा-अभियान के तहत संभल (Sambhal) जिले में एक बार फिर प्रशासन का पीला पंजा गर्जा है। जिले के गुन्नौर तहसील क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम इकौना में शनिवार को राजस्व विभाग और भारी पुलिस बल की उपस्थिति में एक अवैध मजार और छह कब्रों को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया।

प्रशासन का स्पष्ट रुख है कि सार्वजनिक आरक्षित या सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा स्वीकार्य नहीं किया जाएगा। हालांकि, इस प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर स्थानीय मुस्लिम समुदाय ने असंतोष व्यक्त करते हुए इन संरचनाओं को कई दशक पुराना बताया है।

क्या है पूरा मामला और जमीन का कानूनी वर्गीकरण?

गुन्नौर तहसील के तहसीलदार रवि सोनकर के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई राजस्व रिकॉर्ड की सघन जांच के बाद नियमों के तहत की गई है। विवादित जमीन तीन अलग-अलग गाटा संख्याओं में दर्ज है और लगभग साढ़े छह से सात बीघा के एक बड़े क्षेत्र में फैली हुई है।

सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक, यह भूमि ‘ढाकर श्रेणी’ में दर्ज सार्वजनिक आरक्षित जमीन है। इसके एक हिस्से पर अस्थायी निर्माण, एक मजार और छह कब्रें बनाकर अतिक्रमण किया गया था। लेखपाल अभिनव बंसल की आधिकारिक रिपोर्ट के आधार पर इस बेदखली और ध्वस्तीकरण की रूपरेखा तैयार की गई थी।

प्रशासन का पक्ष: “सरकारी भूमि पर किया गया यह निर्माण पूरी तरह अवैध था। संबंधित पक्षों को जमीन खाली करने के लिए नियमानुसार पहले भी औपचारिक सूचना (Notice) दी गई थी, लेकिन उनकी ओर से कब्जा नहीं हटाया गया। इसके बाद ही प्रशासनिक स्तर पर यह विधिक कार्रवाई अमल में लाई गई है।” — तहसीलदार, गुन्नौर

स्थानीय मुस्लिम समुदाय के दावे और कब्रों का इतिहास

एक तरफ जहां प्रशासन इसे हालिया वर्षों का अतिक्रमण मान रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों ने इन कब्रों और मजार को अपनी आस्था और इतिहास से जोड़ते हुए पुरानी बताया है। समुदाय के अनुसार:

  • बाबा सलाउद्दीन (डाक वाले पीर बाबा): इनकी मजार को स्थानीय लोगों द्वारा लगभग 50 वर्ष पुराना बताया जा रहा है।

  • इरशाद हुसैन की कब्र: ग्रामीणों का दावा है कि यह कब्र करीब 150 वर्ष प्राचीन है।

  • चौधरी पीर बख्श की कब्र: इसे लगभग 45 वर्ष पुराना बताया गया है।

  • चौधरी सालार बख्श की कब्र: यह वर्ष 1995 की बताई जाती है।

  • अनवरी बेगम की कब्र: यह सबसे हालिया निर्माण है, जिसे वर्ष 2019 का बताया गया है।

सुरक्षा व्यवस्था और जमीनी स्तर पर तैनात टीम

कार्रवाई के दौरान इकौना गांव में बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण एकत्र हो गए थे, जिससे तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती थी। कानून-व्यवस्था (Law and Order) को बनाए रखने के लिए मौके पर कई थानों की पुलिस और भारी पुलिस बल तैनात किया गया था, जिसके चलते पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई।

इस पूरी अतिक्रमण विरोधी मुहिम के लिए नायब तहसीलदार अनुज कुमार को प्रभारी अधिकारी (In-charge Officer) बनाया गया था। इसके अतिरिक्त, राजस्व निरीक्षक कवेंद्र सिंह और जहरी सिंह को सहायक अधिकारी के रूप में जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इस टीम में मुख्य रूप से लेखपाल अभिनव बंसल, रमेश चंद्र, अभिषेक, सत्यवान सिंह और हर किशोर भी शामिल रहे।

प्रशासन ने चेतावनी जारी करते हुए साफ कर दिया है कि सरकारी और सार्वजनिक आरक्षित संपत्तियों पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में भी ऐसे भू-माफियाओं और अवैध अतिक्रमणों के खिलाफ अभियान निरंतर जारी रहेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *