अमेठी मतदाता सूची लापरवाही: एक ही मकान नंबर पर जुड़े 11 बाहरी नाम, पूर्व सांसद स्मृति ईरानी का नाम भी गायब

अमेठी । रविवार, 21 जून 2026

उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले से मतदाता सूची पुनरीक्षण (Voter List Revision) प्रक्रिया में कथित लापरवाही और गंभीर प्रशासनिक चूक का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। मामला बाजार शुकुल (Shukul Bazar) विकास खंड के अंतर्गत आने वाली तेंदुआ ग्राम पंचायत का है, जहां सरकारी तंत्र की बड़ी लापरवाही के कारण स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश और असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

इस सूची पुनरीक्षण की विश्वसनीयता पर दो बड़े सवाल खड़े हुए हैं—पहला, अमेठी की पूर्व सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी (Smriti Zubin Irani) का नाम उनके निजी आवास की मतदाता सूची से गायब मिलना; और दूसरा, एक स्थानीय हिंदू परिवार के मकान नंबर पर 11 मुस्लिम मतदाताओं के नाम गलत तरीके से दर्ज हो जाना।

क्या है तेंदुआ ग्राम पंचायत का पूरा विवाद?

तेंदुआ ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले गांव ‘पूरे भोजा तिवारी’ के निवासी राधिका प्रसाद शुक्ल ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राधिका प्रसाद के मुताबिक, सरकारी मतदाता सूची में उनके मकान नंबर 114 पर परिवार से बाहर के 11 मुस्लिम मतदाताओं के नाम दर्ज कर दिए गए हैं।

सूची में दर्ज नामों में राबिया बानो, तावसुम, मैशर जहां, अफरोज, सलमान, गुलाम, आशा बानो, कैफ, अरमान खान और अरमान शामिल हैं।

चौंकाने वाला दावा: शिकायतकर्ता राधिका प्रसाद शुक्ल का कहना है कि जिस गांव (पूरे भोजा तिवारी) का यह मामला है, वहां पूरे गांव में मुस्लिम समुदाय का कोई भी परिवार निवास ही नहीं करता है। ऐसे में बिना किसी भौगोलिक आधार या भौतिक सत्यापन के इन 11 मतदाताओं के नाम उनके मकान नंबर पर कैसे दर्ज हो गए, यह पूरी चुनावी पंजीकरण व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।

बीएलओ की रिपोर्ट के बाद भी नहीं सुधरी अंतिम मतदाता सूची

इस मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ऐसा नहीं है कि निचले स्तर के कर्मचारियों को इस गलती का अहसास नहीं था।

  • प्रशासनिक स्तर पर चूक: बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) ने स्वयं इस विसंगति को पहचानते हुए इन नामों को सूची से हटाने (विलोपित करने) के लिए आवश्यक फॉर्म भरे थे।

  • उच्च स्तरीय खामियां: बीएलओ द्वारा फॉर्म भरे जाने के बावजूद, उच्च स्तर पर तकनीकी या लिपिकीय त्रुटियों के चलते इन अवैध नामों को हटाया नहीं जा सका और अंतिम मतदाता सूची में ये नाम यथावत प्रकाशित हो गए।

आईजीआरएस (IGRS) पोर्टल पर ‘भ्रामक’ रिपोर्ट लगाने का आरोप

परेशान शिकायतकर्ता राधिका प्रसाद शुक्ल ने अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए हर संभव कानूनी रास्ता अपनाया। उन्होंने बूथ लेवल ऑफिसर (BLO), ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (BDO) और उपजिलाधिकारी (SDM) को लिखित शिकायती पत्र सौंपे। उन्होंने 19 जनवरी 2026 को बकायदा रजिस्ट्री (Registered Post) के माध्यम से भी उच्च अधिकारियों को अपनी आपत्ति भेजी थी।

जब स्थानीय स्तर पर सुनवाई नहीं हुई, तो पीड़ित ने उत्तर प्रदेश सरकार के आधिकारिक आईजीआरएस (IGRS) जनसुनवाई पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई। लेकिन आरोप है कि इस स्तर पर भी उनके साथ न्याय नहीं हुआ:

  • परिवार रजिस्टर का खेल: आईजीआरएस शिकायत की जांच तेंदुआ के ग्राम पंचायत अधिकारी अमरनाथ तिवारी को सौंपी गई थी।

  • भ्रामक निस्तारण: शिकायतकर्ता का आरोप है कि ग्राम पंचायत अधिकारी ने मतदाता सूची की विसंगतियों की जांच करने के बजाय रिपोर्ट में केवल ‘परिवार रजिस्टर’ (Family Register) की स्थिति का उल्लेख कर दिया और शिकायत को निस्तारित (Close) घोषित कर दिया। जबकि पीड़ित की मुख्य आपत्ति परिवार रजिस्टर को लेकर थी ही नहीं, बल्कि वोटर लिस्ट में दर्ज गलत नामों को लेकर थी। इस भ्रामक आख्या (Investigation Report) के कारण मामला पूरी तरह से पेच में फंस गया।

पूर्व सांसद स्मृति ईरानी का नाम भी सूची से नदारद

इस पुनरीक्षण अभियान की लापरवाही की आंच वीवीआईपी (VVIP) नामों तक भी पहुंची है। अमेठी से पूर्व सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी, जिन्होंने हाल ही में अमेठी में अपना निजी मकान बनवाया है, उनका नाम भी उनके आवास की मतदाता सूची से गायब पाया गया। एक तरफ हाई-प्रोफाइल नामों का छूटना और दूसरी तरफ एक ही ग्रामीण आवास पर दर्जनों बाहरी नामों का दर्ज हो जाना, जिला निर्वाचन कार्यालय की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा करता है।

जिम्मेदार अधिकारियों का क्या है कहना?

इस पूरे मामले के तूल पकड़ने के बाद प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। संबंधित अधिकारियों ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है:

अधिकारी का नाम और पद आधिकारिक वक्तव्य / आश्वासन

अशोक कुमार


(एडीओ पंचायत)

पूर्व में आईजीआरएस शिकायत का निस्तारण प्राप्त जांच आख्या के आधार पर ही किया गया था। यदि जांच रिपोर्ट में कोई तकनीकी त्रुटि, पक्षपात या भ्रम की स्थिति पाई जाती है, तो मामले की दोबारा निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषियों पर आवश्यक कार्रवाई होगी।

नीतेश राज


(एसडीएम, मुसाफिरखाना)

यद्यपि अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन हो चुका है, लेकिन यदि शिकायतकर्ता अंतिम सूची में नाम विलोपित न होने के संबंध में पुनः औपचारिक शिकायत दर्ज कराते हैं, तो इस पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच की जाएगी और नियमों के तहत नाम हटाने की विधिक कार्रवाई सुनिश्चित होगी।

इस गंभीर लापरवाही ने आगामी स्थानीय और अन्य चुनावों शुचिता को लेकर ग्रामीणों के मन में अविश्वास पैदा किया है। अब देखना यह है कि मुसाफिरखाना तहसील प्रशासन इस ‘वोटर लिस्ट स्कैम’ या मानवीय भूल को कितनी जल्दी दुरुस्त करता है।

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