भोपाल । बुधवार, 17 जून 2026
मध्य प्रदेश में कानून व्यवस्था और सामाजिक समानता की दिशा में डॉ. मोहन यादव सरकार एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश सरकार समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर पूरी तरह गंभीर है और इसे आगामी विधानसभा मानसून सत्र में विधेयक के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने पूर्ण विश्वास जताया है कि ‘बाबा महाकाल’ की कृपा से यह महत्वपूर्ण विधेयक इसी सत्र में पारित हो जाएगा।
मुख्यमंत्री ने इसे ‘एक देश, एक कानून’ की राष्ट्रीय भावना से जोड़ते हुए कहा कि बदलते समय में अलग-अलग धर्मों के लिए विवाह, तलाक और पारिवारिक संपत्तियों के अलग-अलग नियमों की आवश्यकता नहीं है। यह कानून समाज में सामाजिक न्याय और एकरूपता की भावना को सुदृढ़ करेगा।
तीन राज्यों की तर्ज पर बढ़ रहे कदम
मुख्यमंत्री ने अपने वक्तव्य में बताया कि देश के तीन राज्यों—उत्तराखंड, गुजरात और असम में इस कानून को लेकर प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है या इसे अपनाया गया है। 2026 की नवीनतम प्रशासनिक जानकारियों के अनुसार, उत्तराखंड के बाद गुजरात और असम ने भी अपने स्तर पर इसे आगे बढ़ाया है। मध्य प्रदेश अब इस सूची में शामिल होने वाला अगला प्रमुख राज्य बनने जा रहा है, जिससे ‘एक देश, एक नियम’ का संकल्प ज़मीनी स्तर पर उतरेगा।
जस्टिस रंजना देसाई समिति कर रही है अध्ययन
मध्य प्रदेश में UCC के सटीक प्रारूप को तैयार करने के लिए सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक छह सदस्यीय उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है।
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यह समिति प्रदेश के विभिन्न जिलों और संभागों का दौरा कर रही है।
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समिति का मुख्य उद्देश्य अलग-अलग धार्मिक, सामाजिक और अल्पसंख्यक वर्गों से सीधे संवाद स्थापित कर उनकी राय जानना है।
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इस जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने एक आधिकारिक UCC-MP वेब पोर्टल भी लॉन्च किया है, जिस पर नागरिकों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों से 15 जून तक ऑनलाइन सुझाव मांगे गए थे।
जनजातीय (आदिवासी) समुदाय को मिलेगी पूर्ण छूट
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण नीतिगत स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि मध्य प्रदेश के जनजातीय समुदायों को समान नागरिक संहिता (UCC) के दायरे से पूरी तरह बाहर (Exempted) रखा जाएगा।
संविधान और आदिवासी संस्कृति के संरक्षण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज के पारंपरिक रीति-रिवाजों, वैवाहिक नियमों और उनकी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए उन्हें पूर्ण स्वतंत्रता दी जाएगी। उत्तराखंड और गुजरात मॉडल की तरह ही मध्य प्रदेश में भी आदिवासियों के हितों और परंपराओं के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी।
परीक्षार्थियों की सुविधाओं पर भी ध्यान
सत्र की रणनीतियों और शासकीय प्राथमिकताओं की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने सिर्फ विधायी कार्यों पर ही नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य पर भी जोर दिया। उन्होंने प्रशासन को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि आगामी नीट (NEET) परीक्षाओं की तैयारी कर रहे परीक्षार्थियों को परीक्षा केंद्रों और यात्रा के दौरान हर संभव सुविधाएं व सुरक्षा प्रदान की जाए।
मुख्य बिंदु: एक नज़र में
| विषय | स्थिति / प्रावधान |
| प्रस्तुति का समय | आगामी विधानसभा मानसून सत्र |
| समिति प्रमुख | जस्टिस (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई |
| अपवर्जन (Exemption) | जनजातीय/आदिवासी समुदायों को पूर्ण छूट |
| मुख्य उद्देश्य | विवाह, विरासत और गोद लेने के नियमों में एकरूपता |
| जन सुझाव माध्यम | विशेष UCC-MP ऑनलाइन पोर्टल |
