कानपुर मंडी भाव: अनाज, दलहन और तिलहन की आवक सामान्य, जानें गेहूं से लेकर अरहर दाल के ताजा रेट

कानपुर । बुधवार, 17 जून 2026

उत्तर प्रदेश के प्रमुख व्यापारिक और औद्योगिक केंद्र कानपुर की अनाज (ग्रेन) मंडियों में इन दिनों मुख्य फसलों, दलहन (Pulses) और तिलहन (Oilseeds) की आवक सामान्य बनी हुई है। चकरपुर और नौबस्ता जैसी बड़ी थोक मंडियों के व्यापारियों के अनुसार, स्थानीय मांग और नियमित आपूर्ति के बीच बेहतर तालमेल होने से बाजार में पूरी तरह संतुलन बना हुआ है। यही कारण है कि अधिकांश कृषि जिंसों की कीमतों में फिलहाल कोई बड़ा उतार-चढ़ाव या मंदी-तेजी देखने को नहीं मिल रही है।

बाजार सुधार और नवीनतम स्थिति का विश्लेषण

बाजार के जानकारों का कहना है कि वर्तमान में थोक और रिटेल दोनों ही स्तरों पर मांग सीमित और संतुलित है। रबी फसलों की मुख्य आवक का दौर पूरा होने के बाद अब मंडी में व्यापार सामान्य गति से चल रहा है। हालांकि, आने वाले दिनों में मानसून की प्रगति और देश के अलग-अलग हिस्सों में बोई जाने वाली खरीफ फसलों की स्थिति के आधार पर कीमतों में हलचल देखने को मिल सकती है। यदि आगामी दिनों में आपूर्ति प्रभावित होती है, तो दालों और खाद्य तेलों की कीमतों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

कानपुर मंडी के प्रमुख भाव (प्रति क्विंटल)

नीचे दी गई तालिका में कानपुर ग्रेन मार्केट के नवीनतम न्यूनतम और अधिकतम थोक भाव दर्शाए गए हैं:

जिंस (Commodity) न्यूनतम भाव (₹) अधिकतम भाव (₹)
गेहूं 2,420 2,475
सरसों 5,450 5,500
चावल 3,380
बाजरा 1,900
अरहर दाल (फूल) 12,100 12,200
अरहर दाल (स्पेशल) 8,800 9,000
मूंग साबुत 7,000 7,100
उड़द (काली) 7,000 7,100
उड़द (हरी) 8,500 8,600
मटर (सूखा) 3,900 4,000

नोट: चावल और बाजरा के लिए मंडी में केवल अधिकतम थोक भाव ही दर्ज किए गए हैं।

दलहन और तिलहन बाजार का हाल

दलहन वर्ग में इस समय सबसे ज्यादा मजबूती अरहर दाल (फूल) में देखी जा रही है, जो ₹12,100 से ₹12,200 प्रति क्विंटल के उच्च स्तर पर कारोबार कर रही है। वहीं, आम उपभोक्ताओं द्वारा ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली अरहर दाल (स्पेशल) ₹8,800 से ₹9,000 के बीच बनी हुई है। मूंग साबुत और उड़द (काली) दोनों ही ₹7,000 से ₹7,100 के दायरे में स्थिर हैं, जिससे आम जनता को थोड़ी राहत है।

तिलहन की बात करें तो सरसों का भाव ₹5,450 से ₹5,500 प्रति क्विंटल के बीच मजबूत बना हुआ है। खाद्य तेलों की घरेलू मांग के कारण सरसों में यह स्थिरता लंबे समय से बनी हुई है।

आगे क्या रहेगा बाजार का रुख?

मंडी समिति के वरिष्ठ व्यापारियों का मानना है कि जून के उत्तरार्ध में मानसून की सक्रियता बाजार की दिशा तय करेगी। यदि उत्तर प्रदेश और पड़ोसी राज्यों में बारिश समय पर और अच्छी होती है, तो फसलों की बुआई तेज होगी जिससे बाजार की धारणा पर सकारात्मक असर पड़ेगा। फिलहाल, खरीदार और विक्रेता दोनों ही फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं और बाजार में किसी भी तरह की सट्टेबाजी की स्थिति नहीं है।

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