सपा सांसद जावेद अली खान का मुरादाबाद में बड़ा बयान: ‘मुस्लिम कार्यकर्ता बनाएं 4 हिंदू दोस्त, तभी थमेगा बीजेपी का रथ’

मुरादाबाद । सोमवार, 15 जून 2026

उत्तर प्रदेश की सियासत में बयानों के तीर चलना कोई नई बात नहीं है, लेकिन समाजवादी पार्टी (SP) के राज्यसभा सांसद जावेद अली खान के हालिया बयान ने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। अपने मुरादाबाद दौरे के दौरान उन्होंने मुस्लिम कार्यकर्ताओं को एक अनोखी और रणनीतिक सलाह दी है, जिसे लेकर राज्य का सियासी तापमान अचानक बढ़ गया है।

क्या है जावेद अली खान का पूरा बयान?

मुरादाबाद में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए सपा सांसद जावेद अली खान ने कहा कि केवल मुस्लिम समुदाय के एकजुट होने या एक जगह इकट्ठा होने से भारतीय जनता पार्टी (BJP) को चुनावी शिकस्त देना मुमकिन नहीं है। उन्होंने मंच से खुलकर कहा:

“मैं अपने मुस्लिम साथियों से कहना चाहता हूँ कि अगर आप पार्टी में हैं, तो कम से कम 4 हिंदू दोस्त बनाइए। सिर्फ आपस में चार मुसलमान दोस्त बनाकर और खुद को अकेला रखकर आप बीजेपी के नैरेटिव से नहीं बच सकते। आपके दोस्त ऐसे होने चाहिए जो आप पर पूरा भरोसा करते हों। जब आप देश के भले की बात करेंगे, तो वे आपकी बात पर यकीन करें। जिस दिन हर मुसलमान अपने 4-4 हिंदू दोस्त बना लेगा, उस दिन बीजेपी की राजनीति का अंत हो जाएगा।”

अल्पसंख्यक से आगे बहुसंख्यक आबादी तक पहुँचने की रणनीति

सांसद ने साफ किया कि समाजवादी पार्टी अब उन इलाकों में भी अपने संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की कोशिश कर रही है, जहाँ अल्पसंख्यक (मुस्लिम) आबादी काफी कम है और हिंदू मतदाताओं की संख्या अधिक है। उनका मानना है कि ऐसे क्षेत्रों में पार्टी कार्यकर्ताओं को दोगुनी मेहनत करनी होगी और बहुसंख्यक समाज के बीच जाकर उनका भरोसा जीतना होगा।

जावेद अली खान ने सत्ताधारी दल पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में जो राजनीतिक नैरेटिव तैयार किया गया है, उसने लोगों की सोच को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि वह किसी पर निजी तौर पर आरोप नहीं मढ़ रहे हैं, बल्कि चुनावी गणित को बदलने के लिए सामाजिक भाईचारे और संवाद को एक औजार की तरह इस्तेमाल करने की सलाह दे रहे हैं।

राजनीतिक बवाल

इस बयान को मीडिया और विपक्षी दलों द्वारा ‘विवादित बयान’ के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे ध्रुवीकरण की राजनीति और चुनावी फायदे के लिए समाज को बांटने की कोशिश करार दिया है।

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