प्रतापगढ़ में अवैध धर्मांतरण मामले का मुख्य आरोपी राजेश कुमार सरोज गिरफ्तार: मान्धाता पुलिस की बड़ी कार्रवाई

प्रतापगढ़ | शनिवार, 23 मई 2026

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले से इस वक्त की एक बड़ी खबर सामने आ रही है। जिले के मान्धाता थाना क्षेत्र में काफी समय से चर्चा में रहे अवैध धर्मांतरण (अवैध रूप से धर्म बदलने के प्रयास) के मामले में पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए मामले के मुख्य वांछित अभियुक्त (Wanted Accused) राजेश कुमार सरोज को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है।

यह कार्रवाई क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से की गई है। आइए विस्तार से समझते हैं कि यह पूरा मामला क्या था और पुलिस ने इसे किस तरह अंजाम दिया।

क्या है पूरा मामला? (बहरिया अहिना गांव की घटना)

मामले की शुरुआत मान्धाता थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम बहरिया अहिना से हुई थी। गांव के ही एक पीड़ित व्यक्ति ने मान्धाता थाने में लिखित शिकायत (तहरीर) दर्ज कराई थी।

शिकायतकर्ता का आरोप था कि गांव का ही निवासी राजेश कुमार सरोज और उसके कुछ अन्य साथी मिलकर सीधे-साधे ग्रामीणों को निशाना बना रहे थे। ये लोग विभिन्न प्रकार के प्रवचनों, तरह-तरह के प्रलोभनों (जैसे आर्थिक मदद या अन्य लालच) और मानसिक या सामाजिक दबाव का इस्तेमाल कर रहे थे ताकि लोगों का धर्म परिवर्तन कराया जा सके।

इस घटना के बाद से ही पूरे बहरिया और मान्धाता क्षेत्र में इस बात को लेकर काफी तनाव और चर्चा का माहौल बना हुआ था। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस तुरंत हरकत में आई।

कानूनी शिकंजा: किन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा?

पीड़ित की तहरीर मिलने के बाद मान्धाता पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझा और आरोपियों के खिलाफ सख्त धाराओं में एफआईआर (FIR) दर्ज की। पुलिस ने उत्तर प्रदेश के कड़े धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत मुकदमा पंजीकृत किया:

  • अधिनियम: उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021

  • धाराएं: धारा 3, 5(1) और 11

इन धाराओं के तहत प्रलोभन, बल या कपटपूर्वक किए जाने वाले धर्मांतरण को एक गंभीर और गैर-जमानती अपराध माना गया है, जिसमें दोषी पाए जाने पर कड़ी सजा और जुर्माने का प्रावधान है। मुकदमा दर्ज होने के बाद से ही मुख्य आरोपी राजेश कुमार सरोज लगातार पुलिस को चकमा देकर फरार चल रहा था।

पुलिस की घेराबंदी और गिरफ्तारी

प्रतापगढ़ के पुलिस अधीक्षक (SP) दीपक भूकर के सख्त निर्देशों पर जिले में वांछित अपराधियों और कानून व्यवस्था को चुनौती देने वालों के खिलाफ एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत इस मामले की कमान उच्च अधिकारियों को सौंपी गई।

अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी आलोक कुमार और क्षेत्राधिकारी (CO) रानीगंज विनय प्रभाकर साहनी के करीबी पर्यवेक्षण (Supervision) में मान्धाता थाना प्रभारी अरविन्द्र कुमार सिंह के नेतृत्व में एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया।

मुखबिर की सूचना पर बहरिया मोड़ पर जाल

उपनिरीक्षक (SI) अरविन्द कुशवाहा अपनी टीम के साथ क्षेत्र में चेकिंग और वांछितों की तलाश में गश्त पर थे। इसी दौरान पुलिस को एक विश्वसनीय मुखबिर से पुख्ता जानकारी मिली कि आरोपी कहीं भागने की फिराक में है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने तुरंत बहरिया मोड़ तिराहा के पास घेराबंदी की और अभियुक्त राजेश कुमार सरोज (उम्र करीब 28 वर्ष, पुत्र बसंतलाल सरोज) को धर दबोचा। कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद माननीय न्यायालय के आदेश पर उसे जेल भेज दिया गया है।

सराहनीय कार्य करने वाली पुलिस टीम:

इस सफल दबोच रणनीति में उपनिरीक्षक अरविन्द कुशवाहा के साथ हेड कांस्टेबल वीरेन्द्र यादव, कांस्टेबल पंकज साहू और महिला कांस्टेबल प्रीती मिश्रा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण विरोधी कानून (लेटेस्ट अपडेट्स)

उत्तर प्रदेश में अवैध धर्मांतरण को रोकने के लिए सरकार लगातार नियमों को और सख्त कर रही है। मूल रूप से बने उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 के तहत छल-कपट, लालच या जबरन धर्म परिवर्तन कराने पर 1 से 10 साल तक की सजा का प्रावधान था।

नवीनतम जानकारी: कानून को और प्रभावी बनाने के लिए इसमें लगातार संशोधन किए जा रहे हैं ताकि कोई भी व्यक्ति सामाजिक सौहार्द को न बिगाड़ सके। पुलिस प्रशासन का कहना है कि किसी भी नागरिक की धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान किया जाएगा, लेकिन यदि कोई प्रलोभन या दबाव का सहारा लेता है, तो उसके खिलाफ शून्य-सहनशीलता (Zero Tolerance) की नीति अपनाई जाएगी।

प्रतापगढ़ पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई से स्थानीय ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है और क्षेत्र में शांति व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है।

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