मानसून 2026: अगस्त की बेरुखी के बाद सितंबर में भी सूखे का साया, जानिए खेती और अर्थव्यवस्था पर क्या पड़ेगा असर

Saransh Kanaujia
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नई दिल्ली । सोमवार, 31 अगस्त 2026
देशभर में मानसून 2026 की चाल ने किसानों और मौसम वैज्ञानिकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। अगस्त महीने में मानसून के कमजोर प्रदर्शन (16.3% बारिश की कमी) के बाद अब भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और विशेषज्ञों का अनुमान है कि सितंबर 2026 में भी देश में सामान्य से कम बारिश होगी।
अनुमानों के मुताबिक, सितंबर में मानसून की बारिश इसके सामान्य दीर्घकालिक औसत (LPA) के 91% से भी कम रह सकती है। यह स्थिति न केवल कृषि क्षेत्र के लिए, बल्कि जलाशयों के जल स्तर और देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बड़ा संकेत है।

सितंबर में क्यों कमजोर पड़ रहा है मानसून? (अल नीनो का प्रभाव)

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, सितंबर में मानसूनी गतिविधियों के मंद पड़ने का सबसे बड़ा कारण El Niño (अल नीनो) जैसी समुद्री और वायुमंडलीय परिस्थितियां हैं।
प्रशांत महासागर की सतह के तापमान में असामान्य वृद्धि (अल नीनो) का सीधा असर भारतीय मानसूनी हवाओं पर पड़ता है। यह वैश्विक मौसम चक्र को प्रभावित करता है, जिससे भारतीय उपमहाद्वीप में मानसूनी बादल कमजोर पड़ जाते हैं। हालांकि, बारिश का यह वितरण पूरे देश में एक समान नहीं होगा; कुछ राज्यों में अचानक तेज बारिश (Flash Floods) हो सकती है, जबकि कई क्षेत्र सूखे जैसे हालात का सामना करेंगे।

कृषि क्षेत्र पर दोहरी मार: खरीफ और रबी दोनों फसलें खतरे में

सितंबर का महीना भारतीय कृषि के लिए अत्यंत निर्णायक होता है। इस दौरान फसलों को पकने और मिट्टी में नमी बनाए रखने के लिए पर्याप्त पानी की जरूरत होती है।
  1. खरीफ फसलों पर दबाव:
    • धान (Rice), कपास (Cotton), सोयाबीन (Soybean), मक्का और दालों जैसी मुख्य खरीफ फसलों के विकास के लिए यह समय बेहद नाजुक है।
    • मिट्टी में लगातार नमी की कमी से फसल की उत्पादकता (Yield) घट सकती है, जिससे किसानों की लागत बढ़ेगी और सिंचाई पर निर्भरता बढ़ जाएगी।
  2. रबी सीजन की तैयारियों पर असर:
    • सितंबर की आखिरी बारिश मिट्टी में नमी का संचयन करती है, जो आगे चलकर रबी फसलों (जैसे गेहूं, सरसों और चना) की बुवाई के लिए आधार तैयार करती है।
    • यदि नमी कम रहती है, तो रबी सीजन की शुरुआती तैयारियों में देरी हो सकती है और बुवाई का रकबा घट सकता है।

जल संसाधनों और ऊर्जा मांग पर बढ़ता दबाव

मानसून केवल खेती ही नहीं, बल्कि देश के पूरे वॉटर-मैनेजमेंट को संचालित करता है:
  • जलाशयों और भूजल का गिरता स्तर: अगस्त और सितंबर में कम बारिश के कारण देश के प्रमुख बांधों और जलाशयों में पानी का भंडारण सामान्य से काफी नीचे रह सकता है।
  • तापमान में बढ़ोतरी: बादलों की कमी और शुष्क मौसम के कारण सितंबर में दिन का तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया जा सकता है।
  • बिजली की बढ़ती खपत: उच्च तापमान और सिंचाई के लिए ट्यूबवेल चलने के कारण ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों में बिजली की मांग (Power Demand) में अचानक उछाल आ सकता है।

किसानों और राज्य सरकारों के लिए आगे का रास्ता

मौसम के इस बदलते मिजाज को देखते हुए राज्य सरकारों, कृषि विभागों और किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है:
  • सूक्ष्म सिंचाई (Micro-Irrigation): पानी की हर बूंद का सही इस्तेमाल करने के लिए ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई को अपनाना होगा।
  • कम पानी वाली फसलें: किसान भाई कृषि वैज्ञानिकों की सलाह से मिट्टी की नमी के अनुसार वैकल्पिक फसलों का चयन कर सकते हैं।
  • जल संरक्षण: आने वाले समय में पानी की किल्लत से बचने के लिए अभी से जल निकायों का संरक्षण आवश्यक है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: सितंबर 2026 में भारत में कितनी बारिश होने का अनुमान है?
Ans: सितंबर 2026 में बारिश दीर्घकालिक औसत (LPA) के 91% से कम रहने का अनुमान जताया गया है, जो सामान्य से काफी कम है।
Q2: मानसून 2026 के कमजोर होने का मुख्य कारण क्या है?
Ans: प्रशांत महासागर में अल नीनो (El Niño) की स्थिति और समुद्री सतह के तापमान में बदलाव को इसका मुख्य कारण माना जा रहा है।
Q3: कम बारिश का असर किन-किन फसलों पर पड़ेगा?
Ans: इसका सीधा असर खरीफ फसलों जैसे धान, कपास, सोयाबीन, मक्का और दालों पर पड़ेगा। साथ ही, मिट्टी में नमी घटने से रबी फसलों (गेहूं, सरसों) की बुवाई भी प्रभावित हो सकती है।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख उपलब्ध मौसम अनुमानों और 31 अगस्त 2026 की रिपोर्टों पर आधारित है। मौसम की वास्तविक स्थिति में स्थानीय वायुमंडलीय कारकों के कारण बदलाव संभव है। किसान भाइयों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी कृषि संबंधी फैसला लेने से पहले अपने स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) या मौसम विभाग की सलाह अवश्य लें।

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