39वां सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला 2026 शुरू: ‘लोकल टू ग्लोबल’ थीम के साथ 50 से अधिक देशों की भागीदारी

Saransh Kanaujia
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चंडीगढ़. हरियाणा के फरीदाबाद में विश्व प्रसिद्ध सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला का 39वां संस्करण आज, 31 जनवरी 2026 से भव्य रूप से शुरू हो गया है। इस अंतरराष्ट्रीय मेले का औपचारिक उद्घाटन सी. पी. राधाकृष्णन ने किया। हर वर्ष की तरह इस बार भी यह मेला भारतीय हस्तशिल्प, लोककला और सांस्कृतिक विविधता का वैश्विक मंच बनकर उभरा है।

‘लोकल टू ग्लोबल’ थीम पर आधारित सूरजकुंड मेला 2026

इस वर्ष सूरजकुंड मेले की मुख्य थीम ‘लोकल टू ग्लोबल’ (Local to Global) रखी गई है। इसका उद्देश्य देश के पारंपरिक और स्थानीय शिल्पकारों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ना और ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को वैश्विक पहचान दिलाना है। मेले में ग्रामीण भारत की कलात्मक विरासत के साथ आधुनिक शिल्प डिज़ाइनों का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है।

उत्तर प्रदेश और मेघालय बने संयुक्त थीम स्टेट

39वें सूरजकुंड शिल्प मेले में इस बार उत्तर प्रदेश और मेघालय को संयुक्त रूप से थीम स्टेट घोषित किया गया है।

  • उत्तर प्रदेश की अवधी, ब्रज और बुंदेलखंडी संस्कृति, पीतल व लकड़ी शिल्प दर्शकों को आकर्षित कर रहे हैं।
  • वहीं मेघालय की जनजातीय कला, बांस एवं हथकरघा उत्पाद और पारंपरिक लोकनृत्य मेले की शोभा बढ़ा रहे हैं।

मिस्र साझेदार देश, अंतरराष्ट्रीय रंग में रंगा मेला

इस वर्ष मिस्र को साझेदार देश (Partner Nation) बनाया गया है। मिस्र के पारंपरिक हस्तशिल्प, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और खान-पान भारतीय दर्शकों के बीच खास आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। मेले में कुल 50 से अधिक देशों की भागीदारी इसे एक वैश्विक सांस्कृतिक उत्सव का रूप देती है।

मेला अवधि, समय और टिकट दरें

  • अवधि: 31 जनवरी से 15 फरवरी 2026
  • समय: प्रतिदिन सुबह 10:30 बजे से रात 8:30 बजे तक
  • टिकट दरें:
    • सामान्य दिन (Weekdays): ₹120
    • सप्ताहांत (Weekends): ₹180

आगंतुक टिकट ऑनलाइन माध्यमों और हरियाणा पर्यटन की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए भी बुक कर सकते हैं।

क्यों खास है 39वां सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला?

  • सैकड़ों भारतीय शिल्पकारों को सीधा मंच
  • विदेशी हस्तशिल्प, लोक-संगीत और नृत्य की रंगारंग प्रस्तुतियां
  • पारंपरिक व्यंजनों का अंतरराष्ट्रीय फूड ज़ोन
  • पर्यटन, संस्कृति और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा

39वां सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला 2026 न सिर्फ भारतीय संस्कृति और हस्तशिल्प का उत्सव है, बल्कि यह स्थानीय कारीगरों को वैश्विक पहचान दिलाने की एक सशक्त पहल भी है। कला, संस्कृति और परंपरा में रुचि रखने वालों के लिए यह मेला एक यादगार अनुभव साबित हो रहा है।

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