पाकिस्तान में पेट्रोल पर हाहाकार! शहबाज शरीफ का बड़ा कबूलनामा—युद्ध की वजह से ढाई गुना बढ़ा आर्थिक बोझ

Saransh Kanaujia
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इस्लामाबाद । गुरुवार, 30 अप्रैल 2026

इस्लामाबाद में आयोजित हालिया कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने देश की जर्जर अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले ‘युद्ध-प्रभाव’ को लेकर गंभीर चिंता जताई है। 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए इस संघर्ष के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार जा चुकी हैं।

शरीफ के अनुसार, पाकिस्तान का साप्ताहिक तेल आयात बिल जो पहले $30 करोड़ था, वह अब बढ़कर $80 करोड़ हो चुका है। यह सीधे तौर पर आम जनता की जेब पर बोझ डाल रहा है, जिसके कारण देश में पेट्रोलियम की खपत में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

पाकिस्तान की ‘शांतिदूत’ बनने की छटपटाहट

पाकिस्तान इस समय न केवल आर्थिक बल्कि कूटनीतिक संकट से भी जूझ रहा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख (COAS) जनरल असीम मुनीर लगातार अमेरिका और ईरान को बातचीत की मेज पर लाने का प्रयास कर रहे हैं।

मुख्य कूटनीतिक घटनाक्रम:

  • 11 अप्रैल की वार्ता: इस्लामाबाद में दोनों पक्षों के बीच शुरुआती बातचीत हुई, जिसे शरीफ ने एक ‘महत्वपूर्ण सफलता’ बताया।

  • ट्रंप का रुख: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अस्थायी युद्धविराम (Ceasefire) पर सहमति तो दी, लेकिन ईरान के सीधे संवाद न करने के रवैये के कारण अंतिम समय में अपने प्रतिनिधियों की इस्लामाबाद यात्रा रद्द कर दी।

  • ईरान की शर्तें: ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में पाकिस्तान के दो संक्षिप्त दौरे किए। हालांकि उन्होंने अमेरिका से सीधी बात से इनकार किया, लेकिन पाकिस्तान के माध्यम से एक नया प्रस्ताव भेजा है।

ईरान का ‘तीन-चरणीय’ शांति प्रस्ताव

ईरान ने इस युद्ध को समाप्त करने के लिए एक ‘स्टेप-बाय-स्टेप’ फॉर्मूला पेश किया है, जिसे पाकिस्तान वाशिंगटन तक पहुँचा रहा है:

  1. प्रथम चरण: पूरे क्षेत्र (लेबनान सहित) में युद्ध की तत्काल समाप्ति।

  2. द्वितीय चरण: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से व्यापार के लिए खोलना और क्षेत्रीय सुरक्षा गारंटी।

  3. तृतीय चरण: परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन पर चर्चा को भविष्य के लिए टालना।

सुधार/सुझाव: हालांकि शहबाज शरीफ इसे अपनी बड़ी सफलता बता रहे हैं, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन “परमाणु मुद्दे” को प्राथमिकता देना चाहता है। ईरान का इसे तीसरे चरण में रखने का प्रस्ताव वाशिंगटन के लिए ‘अस्वीकार्य’ हो सकता है।

निष्कर्ष

पाकिस्तान के लिए यह केवल वैश्विक शांति का मुद्दा नहीं है, बल्कि उसके अपने अस्तित्व की लड़ाई है। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहता है, तो पाकिस्तान में ईंधन और बिजली का संकट गृहयुद्ध जैसी स्थिति पैदा कर सकता है।

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