3 नए आपराधिक कानूनों के 100% क्रियान्वयन के लिए राज्यों को 1 साल की डेडलाइन: अमित शाह

Saransh Kanaujia
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नई दिल्ली | बुधवार, 26 अगस्त 2026
भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली को पूरी तरह आधुनिक और त्वरित बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) की नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटेजीज कॉन्फ्रेंस-2026 के समापन सत्र को संबोधित करते हुए देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अगले 1 वर्ष के भीतर तीनों नए आपराधिक कानूनों के 100 प्रतिशत क्रियान्वयन की सख्त समयसीमा दी है।
गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि इन कानूनों के पूर्ण रूप से लागू होने से न केवल न्यायालयों में लंबित मामलों का निपटारा तेजी से होगा, बल्कि देश में अपराधियों को सजा मिलने की दर (Conviction Rate) में भी ऐतिहासिक सुधार आएगा।

1 जुलाई 2024 से लागू हुए 3 नए आपराधिक कानून

देश में औपनिवेशिक काल के पुराने कानूनों को समाप्त कर 1 जुलाई 2024 से तीन नए नागरिक-केंद्रित कानून लागू किए गए थे:
  • भारतीय न्याय संहिता (BNS): इसने अंग्रेजों के जमाने की भारतीय दंड संहिता (IPC, 1860) का स्थान लिया है।
  • भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS): इसने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC, 1973) की जगह ली है।
  • भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA): इसने भारतीय साक्ष्य अधिनियम (1872) को प्रतिस्थापित किया है।
इन कानूनों का मुख्य उद्देश्य दंड देने के बजाय नागरिकों को समयबद्ध न्याय (Justice) प्रदान करना है।

पुलिसिंग में AI, डेटा एनालिटिक्स और आधुनिक तकनीक पर जोर

गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए पारंपरिक पुलिसिंग व्यवस्था को डिजिटल और हाई-टेक बनाना अनिवार्य है। उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों से निम्नलिखित तकनीकों का अधिकतम इस्तेमाल करने का आह्वान किया:
  1. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): अपराधियों के काम करने के तरीकों (Modus Operandi) का विश्लेषण करने और अपराध को होने से पहले रोकने के लिए।
  2. डेटा एनालिटिक्स: विभिन्न पुलिस स्टेशनों और केंद्रीय एजेंसियों के बीच रियल-टाइम डेटा साझाकरण को मजबूत करने के लिए।
  3. फॉरेंसिक साक्ष्य: गंभीर अपराधों की जांच में अनिवार्य फॉरेंसिक टीम विजिट और डिजिटल सबूतों को कानूनी प्रक्रिया से जोड़ना।

तेज न्याय और बेहतर दोषसिद्धि दर (Conviction Rate) का लक्ष्य

प्रमुख पहलू विवरण व लक्ष्य
समयसीमा (Deadline) 1 वर्ष (2027 तक पूर्ण 100% क्रियान्वयन)
मुख्य उद्देश्य न्याय में देरी को समाप्त करना और डिजिटल साक्ष्यों को प्राथमिकता देना
तकनीकी एकीकरण e-Sakshya, Nyaya Setu, और e-Summon जैसे डिजिटल ऐप्स का उपयोग
प्रणालीगत सुधार पुलिस जांच, फॉरेंसिक साइंस और न्यायिक प्रक्रिया का पूर्ण डिजिटल तालमेल
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
प्रश्न 1: तीन नए आपराधिक कानून कौन-कौन से हैं?
उत्तर: भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA)।
प्रश्न 2: गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यों को क्या समयसीमा दी है?
उत्तर: उन्होंने राज्यों को अगले 1 वर्ष के भीतर इन कानूनों के 100% प्रभावी और पूर्ण क्रियान्वयन का लक्ष्य दिया है।
प्रश्न 3: नए कानूनों में पुलिसिंग के लिए किस तकनीक पर जोर दिया गया है?
उत्तर: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा एनालिटिक्स, डिजिटल रिकॉर्डिंग और आधुनिक फॉरेंसिक तकनीकों के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया है।
Disclaimer: यह लेख उपलब्ध समाचार रिपोर्टों और आधिकारिक बयानों के आधार पर सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है। कानून या नीतियों से जुड़ी किसी भी आधिकारिक अपडेट के लिए गृह मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट देखें।

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