सुकेश चंद्रशेखर दोषसिद्धि 2017 मामला: सुप्रीम कोर्ट जज बनने के स्वांग में तीस हजारी कोर्ट का बड़ा फैसला

Saransh Kanaujia
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नई दिल्ली । बुधवार, 26 अगस्त 2026
दिल्ली की तीस हजारी अदालत की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) हर्षिता मिश्रा ने वर्ष 2017 के एक बहुचर्चित मामले में ठग सुकेश चंद्रशेखर को दोषी करार दिया है। अदालत ने माना कि सुकेश ने पुलिस हिरासत में रहते हुए एक विशेष न्यायाधीश को फोन कर खुद को सुप्रीम कोर्ट का जज और उनका निजी सचिव बताया था। उसने भ्रष्टाचार के एक मामले में खुद के लिए तुरंत जमानत देने का दबाव बनाया और बात न मानने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी थी।

फर्जी कॉल का पूरा मामला

यह घटना अप्रैल 2017 की है जब सुकेश भ्रष्टाचार के मामले में पुलिस हिरासत में था। आरोप के अनुसार, उसने हिरासत में मौजूद पुलिस कांस्टेबल मंजीत के मोबाइल फोन का इस्तेमाल करके विशेष न्यायाधीश को कॉल किया।
  • पहला प्रयास: फोन करने वाले ने खुद को सुप्रीम कोर्ट के एक जज का प्राइवेट सेक्रेटरी बताया।
  • दूसरा प्रयास: फिर उसने खुद को सुप्रीम कोर्ट का जज बताते हुए दावा किया कि वह गृह मंत्रालय और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की ओर से फोन कर रहा है।
  • धमकी: उसने न्यायाधीश पर सुकेश को तुरंत जमानत पर रिहा करने का दबाव डाला और ऐसा न करने पर करियर पर प्रतिकूल असर पड़ने की चेतावनी दी।
  • पुष्टि व पर्दाफाश: संबंधित जज ने जब सुप्रीम कोर्ट के जज के दफ्तर से संपर्क करके इसकी जांच की, तो पता चला कि ऐसा कोई फोन वहां से नहीं किया गया था।

किन धाराओं में ठहराया गया दोषी?

अदालत ने सुकेश को भारतीय दंड संहिता (IPC) की निम्नलिखित तीन गंभीर धाराओं के तहत दोषी पाया है:
  1. IPC धारा 170: लोक सेवक का प्रतिरूपण करना (Impersonating a public servant)।
  2. IPC धारा 189: लोक सेवक को क्षति पहुँचाने की धमकी देना (Threat of injury to a public servant)।
  3. IPC धारा 507: गुमनाम संचार द्वारा आपराधिक धमकी (Criminal intimidation by anonymous communication)।
अदालत ने अपने फैसले में टिप्पणी करते हुए कहा कि न्याय की व्यवस्था फोन कॉल या गुप्त निर्देशों पर नहीं, बल्कि संविधान, कानून और साक्ष्यों के आधार पर चलती है।

दिल्ली पुलिस की जांच पर कोर्ट के तीखे सवाल

फैसले के दौरान अदालत ने दिल्ली पुलिस की ढिलाई और जांच के तरीके पर भी कड़ी नाराजगी व्यक्त की।
  • जिस मोबाइल फोन से फर्जी कॉल की गई थी, पुलिस उसे बरामद करने में नाकाम रही।
  • पुलिस यह स्पष्ट नहीं कर पाई कि सुकेश को कांस्टेबल का फोन कैसे मिला और क्या कांस्टेबल की इसमें कोई भूमिका थी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. सुकेश चंद्रशेखर को 2017 के किस मामले में दोषी ठहराया गया है?
उत्तर: सुकेश को 2017 में सुप्रीम कोर्ट का जज बनकर एक विशेष न्यायाधीश को फोन पर धमकी देने और जमानत का दबाव बनाने के मामले में दोषी ठहराया गया है।
Q2. सुकेश को IPC की किन धाराओं के तहत सजा सुनाई जाएगी?
उत्तर: सुकेश को IPC की धारा 170 (लोक सेवक का प्रतिरूपण), धारा 189 (लोक सेवक को धमकी) और धारा 507 (गुमनाम संचार से धमकी) के तहत दोषी माना गया है।
Q3. इस मामले की सुनवाई किस कोर्ट में हुई है?
उत्तर: इस मामले की सुनवाई दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में CJM हर्षिता मिश्रा की अदालत द्वारा की गई है।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख उपलब्ध अदालती दस्तावेजों और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित एक सूचनात्मक प्रस्तुति है। इस मामले में कानूनी प्रक्रिया और अपील के विकल्प जारी हैं।

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