आईएसबी रिपोर्ट के मुताबिक पारिवारिक व्यवसायों को भविष्य में अपने विकास को बनाए रखने के लिए इनोवेशन करना है बहुत जरूरी

Saransh Kanaujia
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एराइज़ फ्रेमवर्क ने दीर्घकालिक मूल्य निर्माण के लिए रोडमैप पेश किया

इंदौर, फरवरी 2026: भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में तीन‑चौथाई से अधिक योगदान पारिवारिक व्यवसायों का है और 2047 तक देश की वृद्धि में उनकी भूमिका और भी बड़ी होने की उम्मीद है। इंडियन स्कूल ऑफ बिज़नेस (आईएसबी) के नए अध्ययन में सामने आया है कि मध्यम आकार के कई पारिवारिक उद्यमों को अभी-भी भारत में हो रही आर्थिक वृद्धि का लाभ नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि वो अल्पकालिक लाभ पर अपना ध्यान केंद्रित करते हैं, जिसकी वजह से वो टेक्नोलॉजी और इकोसिस्टम के माध्यम से भविष्य के लिए निवेश नहीं कर पाते, जो ग्लोबल कंपनियों को मिलने वाली एक महत्वपूर्ण बढ़त होती है।

आईएसबी की नई रिपोर्ट, ‘‘बिज़नेस इनोवेशन- एन इंपरेटिव फॉर इंडियन फैमिली-लेड बिज़नेस’ (बिज़नेस इनोवेशन- भारत में पारिवारिक उद्यमों के लिए जरूरी) में सामने आया है कि पारिवारिक व्यवसाय स्थानीय और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद होते हैं, लेकिन फिर भी इनमें से कई व्यवसाय धीरे-धीरे बढ़ने वाले विकास मॉडल्स पर आश्रित हैं, और उच्च वृद्धि करने वाले सेक्टर्स का पूरा लाभ नहीं ले पाते हैं। यह कमी ज्यादातर मिड-साइज़ वाले उद्यमों में देखने को मिलती है, जो मजबूत ऑपरेशनल आधार पर बने होते हैं, लेकिन उनके पास बाजार का निर्माण करने, गैर-भौतिक संपत्तियों में निवेश करने और अपने मुख्य व्यवसाय के साथ भविष्य के रेवेन्यू मॉडल का विकास करने की दूरदर्शिता और महत्वाकांक्षा की कमी होती है।

यह रिपोर्ट आईएसबी के सेंटर फॉर बिज़नेस इनोवेशन और थॉमस श्मिडहेनी सेंटर फॉर फैमिली एंटरप्राइज़ द्वारा तैयार की गई है, जिसमें ऑटो, रिटेल, फार्मा, हैल्थकेयर, आईटी, कंस्ट्रक्शन आदि सेक्टर्स में मुख्य भारतीय पारिवारिक व्यवसायों के इनोवेशन एवं विकास के पैटर्न का आकलन किया है। इस रिपोर्ट में सामने आया कि संचालन के पारंपरिक तरीकों के बजाए प्रोडक्ट इनोवेशन, सप्लाई चेन इंटीग्रेशन और कस्टमर इंगेज़मेंट में निवेश से बेहतर दीर्घकालिक मूल्य निर्माण एवं विकास संभव होता है तथा मजबूती मिलती है।

अध्ययन में यह भी सामने आया कि पारिवारिक उद्यमों को सबसे बड़ा जोखिम बाजार के उतार-चढ़ाव से नहीं, बल्कि रणनीति की गतिहीनता से हो रहा है। डिजिटल परिवर्तन, वैश्विक प्रतिस्पर्धा और विकसित होते हुए ग्राहक बाजार के वातावरण में यदि भारतीय व्यवसायों द्वारा खासकर ग्लोबल साउथ के उच्च वृद्धि वाले क्षेत्र में विकास के इंटीग्रेटेड मॉडल और टेक्नोलॉजी, जिसमें एआई भी शामिल है, एवं पार्टनरशिप्स में साहसी निवेश नहीं किया जाएगा, तो इससे उनका दायरा और वैश्विक विस्तार बाधित होगा।

इन चुनौतियों को हल करने के लिए इस रिपोर्ट में भविष्य के विकास के रोडमैप के रूप में एराइज़ फ्रेमवर्क- एंबिशन, रिस्क-टेकिंग, इनोवेशन, स्पीड एवं स्केल और इकोसिस्टम थिंकिंग का सुझाव दिया गया है। इसमें साहसी लक्ष्यों, समय पर डिसीज़न-मेकिंग, बिज़नेस मॉडल इनोवेशन और महत्वपूर्ण साझेदारियों का महत्व प्रदर्शित किया गया है, ताकि पारिवारिक व्यवसाय विस्तार कर सकें, पूरे विश्व में प्रतिस्पर्धा करने के काबिल बनें और दीर्घकालिक मूल्य का निर्माण कर सकें।

प्रोफेसर राजेंद्र श्रीवास्तव, नोवार्टिस प्रोफेसर ऑफ मार्केटिंग स्ट्रेटेजी एंड इनोवेशन, आईएसबी और एग्ज़िक्यूटिव डायरेक्टर, आईएसबी सेंटर फॉर बिज़नेस इनोवेशन, ने कहा, “भारत में पारिवारिक व्यवसाय एक नए युग में प्रवेश कर रहे हैं, जहाँ उन्हें प्रबंधन और विरासत को बनाए रखने के साथ फुर्ती और इनोवेशन की जरूरत भी है। इसलिए अब ईबीआईटीडीए पर केंद्रित रहने से आगे बढ़ना होगा। यह समय टेक्नोलॉजी, डिज़ाइन थिंकिंग, प्लेटफॉर्म बिज़नेस मॉडल, बाजार एवं ब्रांड के विकास के माध्यम से भविष्य की वृद्धि में तेजी से निवेश करने का है। विभिन्न सेक्टर्स का उदाहरण लेकर इस रिपोर्ट में उन कंपनियों के बारे में बताया गया है, जिन्होंने इनोवेशन के माध्यम से अपने व्यवसाय का विस्तार किया और भारत के गतिशील बाजार में विकास के अवसरों का लाभ उठाया।“

तेजी से बदलते और प्रतिस्पर्धी परिवेश में पारिवारिक स्वामित्व के बिज़नेस की अद्वितीय चुनौतियों को पहचानते हुए आईएसबी, जिसे फाइनेंशियल टाईम्स द्वारा ग्लोबल बिज़नेस स्कूलों में लगातार 12वें स्थान पर रखा गया है, ने पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम इन मैनेजमेंट फॉर फैमिली बिज़नेस (पीजीपी एमफैब) जैसे प्रोग्राम के माध्यम से एक दशक से अधिक समय से व्यावसायिक परिवारों के साथ साझेदारी की है। यह पारिवारिक उद्यमों की विरासत को बनाए रखते हुए उन्हें प्रोफेशनल बनाने वाला प्रोग्राम है, जो विश्वस्तर की फैकल्टी, अंतर्राष्ट्रीय एक्सपोज़र, उद्योग के साथ बातचीत और हैंड्स-ऑन एक्सपीरियंशल लर्निंग द्वारा अगली पीढ़ी के लीडर्स को आधुनिक मैनेजमेंट टूल्स और लर्निंग का समृद्ध अनुभव प्रदान करके उन्हें विकास के लक्ष्य प्राप्त करने में समर्थ बनाता है।

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