सम्पादकीय : 77वां गणतंत्र दिवस पर ‘वंदे मातरम्’ की अमर गूँज और विकसित भारत का संकल्प

Saransh Kanaujia
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आज 26 जनवरी 2026 को समूचा भारत राष्ट्रभक्ति के अनूठे रंग में रंगा है। दिल्ली के कर्तव्य पथ पर जहाँ सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक झांकियां देश की प्रगति की कहानी सुना रही हैं, वहीं इस साल के उत्सव में एक विशेष आध्यात्मिक और ऐतिहासिक ऊर्जा घुली हुई है। इस वर्ष हम न केवल अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहे हैं, बल्कि अपने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के रचना के 150वें वर्ष का उत्सव भी मना रहे हैं।

1. वंदे मातरम्: 150 वर्षों का प्रेरणादायी सफर (1876-2026)

बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा 1876 में रचित ‘वंदे मातरम्’ महज़ एक गीत नहीं, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का बीज मंत्र था।

  • क्रांतिकारी उद्घोष: जब 1905 में बंगाल विभाजन हुआ, तो ‘वंदे मातरम्’ वह नारा बना जिसने पूरे देश को एक सूत्र में पिरो दिया। ब्रिटिश हुकूमत इस गीत से इतनी भयभीत थी कि इसके गायन पर प्रतिबंध तक लगा दिए गए थे।

  • सांस्कृतिक पहचान: ऋषि अरबिंदो ने इसे ‘राष्ट्र की सामूहिक चेतना’ कहा था। 150 वर्षों बाद भी, यह गीत हर भारतीय के हृदय में अपनी मातृभूमि के प्रति असीम श्रद्धा पैदा करता है।

  • 2026 का विशेष उत्सव: केंद्र सरकार ने 7 नवंबर 2025 से 7 नवंबर 2026 तक पूरे देश में इस गीत की 150वीं वर्षगांठ मनाने का निर्णय लिया है। आज की परेड की मुख्य थीम भी इसी गीत की भावना के इर्द-गिर्द बुनी गई है।

2. गणतंत्र दिवस 2026 की मुख्य विशेषताएं

इस वर्ष का समारोह कई मायनों में ऐतिहासिक और भविष्योन्मुखी है:

  • थीम (Theme): “स्वतंत्रता का मंत्र – वंदे मातरम्” और “समृद्धि का मंत्र – आत्मनिर्भर भारत”। यह थीम दर्शाती है कि बिना अपनी सांस्कृतिक जड़ों को याद किए आर्थिक विकास अधूरा है।

  • मुख्य अतिथि: इस बार गणतंत्र दिवस पर यूरोपीय संघ (EU) का शीर्ष नेतृत्व भारत का अतिथि बना है, जो वैश्विक राजनीति और व्यापार (FTA) में भारत के बढ़ते कद का प्रमाण है।

  • नारी शक्ति का प्रदर्शन: इस वर्ष की परेड में महिला शक्ति का अभूतपूर्व नेतृत्व देखने को मिला, जो ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के बाद भारत की बदलती सामाजिक तस्वीर को बयां करता है।

3. संविधान की गरिमा और ‘विकसित भारत 2047’

26 जनवरी 1950 को जब हमारा संविधान लागू हुआ, तो हमने एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य बनने का संकल्प लिया था। आज हम उस यात्रा के 76 वर्ष पूरे कर चुके हैं।

  • अधिकार और कर्तव्य: संविधान हमें अधिकार देता है, लेकिन ‘वंदे मातरम्’ हमें कर्तव्यों और राष्ट्र के प्रति समर्पण की याद दिलाता है।

  • डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भरता: आज का गणतंत्र केवल सरहदों की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तकनीक, अंतरिक्ष और अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर भी आत्मनिर्भर बन रहा है।

4. आज की प्रासंगिकता: युवाओं के लिए संदेश

150 साल पहले जब ‘वंदे मातरम्’ लिखा गया था, तब चुनौती गुलामी थी। आज की चुनौती ‘आधुनिकता और विरासत’ के बीच संतुलन की है। युवाओं को यह समझना होगा कि गणतंत्र की मजबूती केवल सरकारी तंत्र में नहीं, बल्कि नागरिकों के चरित्र और राष्ट्र के प्रति उनकी निष्ठा में है।

“वंदे मातरम्, वंदे मातरम्.. सुजलाम् सुफलाम् मलयज शीतलाम्..”

यह केवल पंक्तियाँ नहीं हैं, यह भारत की भौगोलिक सुंदरता, वीरता और एकता का सजीव चित्र है। आइए, इस 77वें गणतंत्र दिवस पर हम संकल्प लें कि हम अपने संविधान की मर्यादा बनाए रखेंगे और ‘वंदे मातरम्’ के मंत्र को अपने कर्मों से जीवंत करेंगे।

सारांश कनौजिया, संपादक

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