वीरता पुरस्कार 2026: देश के 982 जांबाजों को सम्मान; यूपी के धर्मेश शाही ने रचा इतिहास, देखें विजेताओं की पूरी सूची

Saransh Kanaujia
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नई दिल्ली. गणतंत्र दिवस 2026 के पावन अवसर पर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने कुल 982 पुलिस और सेवा कर्मियों को वीरता और सेवा पदक देने की घोषणा की है। इनमें से 125 कर्मियों को ‘वीरता पदक’ (Gallantry Medal) से सम्मानित किया जा रहा है।

यह केवल पदक नहीं हैं, बल्कि उन कहानियों का प्रमाण हैं जहाँ कर्तव्य के आगे जान की कीमत शून्य हो गई।

1. वीरता पुरस्कार 2026: एक नज़र में

  • कुल पदक: 982 (पुलिस, अग्निशमन, होमगार्ड और नागरिक सुरक्षा)।

  • वीरता पदक (GM): 125 (121 पुलिस कर्मी और 4 अग्निशमन कर्मी)।

  • विशिष्ट सेवा पदक (PSM): 101।

  • सराहनीय सेवा पदक (MSM): 756।

2. उन ‘गुमनाम नायकों’ की कहानियाँ (Special Highlights)

यूपी पुलिस का गौरव: डिप्टी एसपी धर्मेश शाही

उत्तर प्रदेश एसटीएफ के डिप्टी एसपी धर्मेश कुमार शाही ने इस बार इतिहास रच दिया है। उन्हें 5वीं बार राष्ट्रपति का वीरता पदक प्रदान किया जा रहा है। मथुरा में मुख्तार अंसारी और शहाबुद्दीन गैंग से जुड़े एक लाख के इनामी अपराधी को मार गिराने में उनकी अदम्य वीरता ने उन्हें यह सम्मान दिलाया।

जम्मू-कश्मीर के जांबाज (45 वीरता पदक)

इस साल सर्वाधिक वीरता पदक (45) जम्मू-कश्मीर के ऑपरेशन्स के लिए दिए गए हैं। इनमें उन जवानों की वीरता शामिल है जिन्होंने घुसपैठ की कोशिशों को नाकाम करने के लिए बर्फबारी और पहाड़ियों के बीच अपनी अंतिम सांस तक लड़ाई लड़ी।

नक्सल मोर्चे पर सर्वोच्च बलिदान (35 पदक)

वामपंथी उग्रवाद (LWE) प्रभावित क्षेत्रों में तैनात 35 जवानों को सम्मानित किया गया है। इनमें कई ऐसे नायक हैं जिन्होंने आईईडी ब्लास्ट के बीच अपने साथियों की जान बचाई और खुद शहीद हो गए।

3. पुरस्कारों का विवरण (राज्य और बल वार)

राज्य/बल वीरता पदक (Gallantry Medals) खास बात
जम्मू-कश्मीर पुलिस 33 घाटी में शांति बनाए रखने के लिए सर्वोच्च सम्मान।
महाराष्ट्र पुलिस 31 नक्सल विरोधी अभियानों में वीरता।
उत्तर प्रदेश पुलिस 18 एसटीएफ और अपराधी उन्मूलन में सक्रियता।
CRPF 12 केंद्रीय बलों में सर्वाधिक वीरता पदक।
दिल्ली पुलिस 14 राजधानी की सुरक्षा और सतर्कता के लिए।

4. ‘मातृभूमि’ का नमन: क्यों महत्वपूर्ण हैं ये सम्मान?

ये पदक हमें याद दिलाते हैं कि जब हम उत्सव मना रहे होते हैं, तब सरहद पर या देश के भीतर कोई जवान अपनी नींद कुर्बान कर रहा होता है। इनमें से कई पुरस्कार मरणोपरांत (Posthumous) दिए गए हैं, जो यह बताते हैं कि ‘मातृभूमि’ का कर्ज चुकाने के लिए उन्होंने अपने परिवार की खुशियों को पीछे छोड़ दिया।

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