AI के दौर में भी ‘भारतीय हुनर’ की चमक रहेगी बरकरार: मुकेश अंबानी

Saransh Kanaujia
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मुंबई. रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने हाल ही में एक संबोधन के दौरान प्रौद्योगिकी और मानवीय संवेदनाओं के मेल पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भले ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) दुनिया को तेजी से बदल रहा है, लेकिन भारतीय हस्तशिल्प और पारंपरिक कला का स्थान कभी कोई मशीन नहीं ले सकती।

बयान के मुख्य बिंदु: मशीन बनाम इंसान

अंबानी ने इस बात पर जोर दिया कि AI डेटा और एल्गोरिदम पर आधारित है, जबकि भारतीय कला ‘आत्मा और इतिहास’ से जुड़ी है। उनके संबोधन के प्रमुख अंश इस प्रकार हैं:

  • संवेदनाओं का कोई विकल्प नहीं: AI डिजाइन बना सकता है, लेकिन वह उस ‘भाव’ और ‘परंपरा’ को नहीं समझ सकता जो एक बुनकर अपनी साड़ी में या एक मूर्तिकार अपनी छैनी से पत्थर में उकेरता है।

  • अद्वितीयता (Uniqueness): मशीनें लाखों प्रतियां एक जैसी बना सकती हैं, लेकिन हस्तशिल्प की हर कृति अपने आप में अनोखी होती है। यही ‘अपूर्णता में पूर्णता’ (Imperfection is Perfection) भारतीय कला की वैश्विक मांग का आधार है।

  • सशक्तिकरण का साधन: AI का उपयोग भारतीय कारीगरों को विस्थापित करने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें वैश्विक बाजार से जोड़ने के लिए एक उपकरण के रूप में किया जाना चाहिए।

बाजार और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि अंबानी का यह बयान भारत के ‘स्वदेशी’ आंदोलन को डिजिटल युग में नई दिशा देता है।

  1. ग्लोबल मार्केटप्लेस: रिलायंस रिटेल और ‘अजीओ’ (AJIO) जैसे प्लेटफॉर्म पहले से ही स्थानीय कारीगरों के उत्पादों को दुनिया भर में पहुँचा रहे हैं।

  2. रोजगार की सुरक्षा: ग्रामीण भारत में कृषि के बाद हस्तशिल्प रोजगार का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है। AI के दौर में इस क्षेत्र को सुरक्षित रखना आर्थिक स्थिरता के लिए अनिवार्य है।

  3. प्रीमियम वैल्यू: जैसे-जैसे दुनिया डिजिटल और कृत्रिम होती जा रही है, ‘Handmade’ (हाथ से निर्मित) वस्तुओं की वैल्यू और कीमत दोनों में भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है।

“तकनीक हमें गति दे सकती है, लेकिन हमारी संस्कृति और कला हमें पहचान देती है। AI हमारी क्षमताओं को बढ़ाएगा (Augment), लेकिन यह हमारी विरासत को कभी खत्म नहीं कर पाएगा।”

मुकेश अंबानी

तकनीक और परंपरा का संगम

मुकेश अंबानी का दृष्टिकोण यह है कि हमें AI से डरने के बजाय उसे एक ‘को-पायलट’ की तरह इस्तेमाल करना चाहिए। उदाहरण के तौर पर, एक बुनकर AI का उपयोग नए और जटिल पैटर्न सोचने के लिए कर सकता है, लेकिन अंतिम उत्पाद उसके हाथों के हुनर से ही निकलेगा। यह ‘हाई-टेक और हाई-टच’ का संगम ही 21वीं सदी के भारत की पहचान बनेगा।

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