बकरीद से पहले सुवेंदु अधिकारी सरकार को चुनौती: हुमायूं कबीर बोले- ‘1400 साल से हो रही है गाय की कुर्बानी, कोई नहीं रोक सकता’

Saransh Kanaujia
5 Min Read

कोलकाता । गुरुवार, 21 मई 2026

पश्चिम बंगाल की राजनीति में बकरीद से पहले एक बार फिर धार्मिक और सामाजिक तापमान चरम पर पहुंच गया है। हाल ही में हुए बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में अपनी नई नवेली पार्टी से धमाकेदार जीत दर्ज करने वाले विधायक और आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के चीफ हुमायूं कबीर ने गाय की कुर्बानी को लेकर एक बेहद विवादास्पद बयान दिया है। कबीर ने सीधे तौर पर राज्य की नई राजनीतिक व्यवस्था और शुभेंदु अधिकारी को चुनौती देते हुए कहा है कि दुनिया की कोई भी ताकत कुर्बानी को नहीं रोक सकती।

‘1400 साल पुरानी परंपरा, दुनिया रहने तक जारी रहेगी’

हुमायूं कबीर ने मीडिया से बात करते हुए साफ लहजे में कहा कि कुर्बानी की यह रीत आज की नहीं है, बल्कि 1400 साल पुरानी है। उन्होंने दावा किया, “कुर्बानी कोई मना करेगा भी तो उसे नहीं सुना जाएगा। सत्ता में शुभेंदु अधिकारी आ गए हैं, यह ठीक है कि लोगों ने उनको वोट दिए हैं और वे सरकार चलाएंगे। लेकिन मेरा कहना है कि जितने दिन तक दुनिया रहेगी, यह कुर्बानी होकर रहेगी।”

कबीर यहीं नहीं रुके, उन्होंने आगे कहा कि बकरीद के मौके पर केवल बकरे की ही नहीं, बल्कि गाय, ऊंट और दुम्बा समेत उन सभी पशुओं की कुर्बानी दी जाएगी जो धार्मिक रूप से जायज हैं और इसे कोई रोक नहीं सकता।

बंगाल सरकार के नियमों पर साधा निशाना

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल सरकार ने हाल ही में बकरीद के मद्देनजर बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के गाय और भैंसों के वध पर सख्ती बरतने का एक नोटिस जारी किया था। इस पर टिप्पणी करते हुए हुमायूं कबीर ने कहा कि सरकार सुबह क्या बोलती है और अगले दिन क्या बोलती है, उस पर वे कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते।

कबीर ने सरकार को घेरते हुए कहा, “वे मुसलमानों को गाय खाने से मना कर रहे हैं, उनकी सरकार है, वे नियम बना सकते हैं। लेकिन धार्मिक कुर्बानी तो होकर ही रहेगी। भारत सरकार खुद बीफ निर्यात करके पैसे कमाती है, और यहां आम जनता की कुर्बानी पर सवाल उठाए जा रहे हैं।”

कौन हैं हुमायूं कबीर? टीएमसी से सस्पेंशन से लेकर AJUP की दोहरी जीत तक

हुमायूं कबीर बंगाल की राजनीति का एक ऐसा चेहरा बन चुके हैं जो अक्सर अपने आक्रामक बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं।

  • दिसंबर 2025 का विवाद: कबीर तब देशव्यापी सुर्खियों में आए थे जब उन्होंने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद के नाम पर एक नई भव्य मस्जिद के निर्माण का ऐलान कर दिया था। इस बयान के तुरंत बाद ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने उन्हें पार्टी से सस्पेंड कर दिया था।

  • AJUP का गठन और इतिहास: टीएमसी से निकाले जाने के बाद उन्होंने ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ (AJUP) का गठन किया।

  • 2026 चुनाव में ऐतिहासिक जीत: मई 2026 में आए बंगाल चुनाव नतीजों में उन्होंने अपने दम पर इतिहास रच दिया। कबीर ने खुद दो विधानसभा सीटों—रेजीनगर और नौदा (Nowda) से चुनाव लड़ा और दोनों ही जगहों पर बीजेपी और टीएमसी के उम्मीदवारों को भारी मतों के अंतर से शिकस्त देकर विधानसभा पहुंचे।

बढ़ सकता है सांप्रदायिक और राजनीतिक तनाव

पश्चिम बंगाल में 37 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम आबादी के अधिकारों की बात करने वाले हुमायूं कबीर का यह बयान सीधे तौर पर राज्य में ध्रुवीकरण को हवा दे सकता है। जहाँ एक तरफ भाजपा नेता और सरकार इस पर सख्त कानून व्यवस्था की दुहाई दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कबीर ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि सरकार ‘आग से न खेले’। बकरीद से ठीक पहले आया यह बयान आने वाले दिनों में कोर्ट-कचहरी या सड़कों पर बड़े सियासी ड्रामे का सबब बन सकता है।

Related Post

Share This Article