मिसाइल तैनात! अरब सागर में भारतीय नौसेना की बड़ी घेराबंदी, क्या टल जाएगा तेल का संकट?

Saransh Kanaujia
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नई दिल्ली. मध्य पूर्व में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन को हिलाकर रख दिया है। दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी गतिरोध के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘ऑपरेशन संकल्प’ के तहत बड़ी घेराबंदी की है।

🚢 भारतीय नौसेना की ‘साइलेंट’ स्ट्राइक: तैनात किए गए सबसे आधुनिक युद्धपोत

सूत्रों के अनुसार, भारतीय नौसेना ने अरब सागर और ओमान की खाड़ी में अपनी उपस्थिति को दोगुना कर दिया है।

  • INS सूरत और INS इम्फाल की तैनाती: भारत के सबसे आधुनिक विशाखापत्तनम-क्लास (Project 15B) गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स को इस क्षेत्र में तैनात किया गया है। ये युद्धपोत ब्रह्मोस मिसाइलों और उन्नत वायु रक्षा प्रणालियों से लैस हैं।

  • एस्कॉर्ट मिशन: नौसेना ने सफलतापूर्वक ‘शिवालिक’, ‘नंदा देवी’ (LPG टैंकर) और ‘जग लाडकी’ (कच्चा तेल टैंकर) को सुरक्षित रूप से संवेदनशील क्षेत्र से बाहर निकाला है।

  • रणनीतिक स्थिति: ये जहाज सीधे संघर्ष क्षेत्र में प्रवेश करने के बजाय उसके पूर्वी मुहाने पर तैनात रहकर भारतीय जहाजों को ‘सुरक्षित गलियारा’ (Safe Passage) प्रदान कर रहे हैं।

भारतीय नौसेना की बढ़ती ताकत: INS इम्फाल की विशेषताएं

⚠️ वर्तमान स्थिति: 22 भारतीय जहाज और 611 नाविक अभी भी कतार में

शिपिंग मंत्रालय के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, तनाव के कारण व्यापारिक गतिविधियों में आई रुकावट से स्थिति गंभीर बनी हुई है:

  • फंसे हुए जहाज: लगभग 22 भारतीय ध्वज वाले जहाज अभी भी फारस की खाड़ी (Persian Gulf) के पश्चिमी हिस्से में फंसे हुए हैं।

  • कार्गो की मात्रा: इन जहाजों पर 16.7 लाख टन कच्चा तेल, 3.2 लाख टन LPG और 2 लाख टन LNG लदा हुआ है।

  • सुरक्षा: विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि सभी 611 भारतीय नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं और उन्हें निकालने के लिए ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत जारी है।

ईरान-इजरायल तनाव का भारत की अर्थव्यवस्था पर असर

💸 अर्थव्यवस्था पर असर: $110 के पार पहुंचा कच्चा तेल

होर्मुज जलमार्ग के आंशिक रूप से बंद होने का असर भारतीय और वैश्विक बाजारों पर दिखने लगा है:

  1. कीमतों में उछाल: अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड $110 प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है।

  2. महंगाई का खतरा: भारत अपनी जरूरत का 90% LPG और 50% कच्चा तेल इसी क्षेत्र से लाता है। यदि यह संकट लंबा खिंचता है, तो देश में पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।

  3. बीमा लागत: समुद्री जोखिम बढ़ने के कारण जहाजों के ‘वार रिस्क प्रीमियम’ में भारी वृद्धि हुई है।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल: क्या बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?

🌍 भारत की ‘स्वतंत्र’ कूटनीति: अमेरिका के साथ सैन्य गठबंधन से इनकार

भारत ने एक बार फिर अपनी रणनीतिक स्वायत्तता का परिचय दिया है।

“हमने अमेरिका के नेतृत्व वाले किसी भी बहुराष्ट्रीय सैन्य गठबंधन में शामिल होने के बजाय स्वतंत्र रूप से काम करने का फैसला किया है। ‘ऑपरेशन संकल्प’ हमारा अपना मिशन है, जिसका उद्देश्य केवल भारतीय हितों की रक्षा करना है।” – विदेश मंत्रालय (MEA)

भारत इस मामले में ईरान के साथ सीधे संपर्क में है। ईरान ने भी संकेत दिए हैं कि वह उन देशों के जहाजों को रास्ता देने के लिए तैयार है जो इस संघर्ष में उसके ‘शत्रु’ नहीं हैं।

🛡️ क्या भारत के पास पर्याप्त बैकअप है?

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की स्थिति 1970 के दशक के संकट जैसी नहीं है:

  • रणनीतिक भंडार (SPR): भारत के पास विशाखापत्तनम, मैंगलोर और पादुर में भूमिगत गुफाओं में 74 दिनों का आपातकालीन तेल भंडार मौजूद है।

  • रूस और अफ्रीका से आपूर्ति: भारत अब केवल खाड़ी देशों पर निर्भर नहीं है; रूस फिलहाल भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है, जिससे जोखिम कम हुआ है।

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