पंजाब में ‘शिक्षा क्रांति’ पर भारी प्रशासनिक संकट: आधे स्कूलों में प्रिंसिपल नहीं, 26 साल से प्रमोशन का इंतज़ार

Saransh Kanaujia
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चंडीगढ़. पंजाब सरकार की ‘शिक्षा क्रांति’ के बड़े-बड़े दावों के बीच राज्य की स्कूली शिक्षा व्यवस्था एक गहरे प्रशासनिक संकट में फंस गई है। राज्य के सरकारी स्कूलों में स्वीकृत प्रिंसिपल के लगभग आधे पद खाली पड़े हैं, जिससे न केवल स्कूलों का अनुशासन बिगड़ रहा है, बल्कि शिक्षकों में भी भारी निराशा व्याप्त है।

आंकड़ों में संकट की तस्वीर

शिक्षा विभाग के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, प्रदेश में प्रिंसिपल के कुल 1950 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 900 से अधिक पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। रिक्तियों का यह अंबार विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठकों में हो रही देरी के कारण लगा है।

तथ्य: आखिरी बार DPC की बैठक 29 नवंबर 2022 को हुई थी। तब से अब तक न तो नई पदोन्नतियां हुईं और न ही खाली पदों को भरने के लिए कोई ठोस कदम उठाए गए। इस बीच, कई पुराने अधिकारी सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं।

एक कंधे पर चार स्कूलों का बोझ

रिक्तियों का असर जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। फरीदकोट जैसे जिलों से आ रही रिपोर्टों के अनुसार, कार्यरत प्रिंसिपलों को एक साथ 3 से 4 स्कूलों का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है।

  • प्रभाव: एक प्रिंसिपल के लिए कई स्कूलों की निगरानी करना असंभव हो रहा है।

  • नतीजा: स्कूलों की शैक्षणिक गुणवत्ता गिर रही है और प्रशासनिक कार्य ठप पड़ रहे हैं।

26 साल की सेवा, लेकिन प्रमोशन शून्य

शिक्षा विभाग के लेक्चररों में इस स्थिति को लेकर गहरा रोष है। विभाग द्वारा 16 फरवरी 2026 को जुटाए गए आंकड़ों से एक चौंकाने वाला सच सामने आया है:

  • 500 से अधिक लेक्चरर पिछले 20 से 26 वर्षों से एक ही पद पर कार्य कर रहे हैं।

  • उन्हें अपने पूरे करियर में एक भी प्रमोशन नहीं मिला है।

  • तुलनात्मक रूप से, अन्य विभागों में उनके जूनियर अधिकारी कई बार पदोन्नत होकर उच्च पदों पर पहुँच चुके हैं।

कानूनी पेच और सरकारी आश्वासन

प्रिंसिपल के पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया भी वर्ष 2019-20 के बाद से ठप है, जिसका मुख्य कारण कानूनी विवाद बताए जा रहे हैं।

इस गंभीर मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए स्कूल शिक्षा विभाग की सचिव, सोनाली गिरी (IAS) ने कहा, “सरकार इस समस्या की गंभीरता को समझती है। रिक्त पदों को भरने और प्रमोशन की प्रक्रिया को जल्द से जल्द शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।”

हालाँकि, शिक्षक संघों का कहना है कि उन्हें अब खोखले आश्वासनों पर यकीन नहीं है। जब तक विभाग ठोस अधिसूचना जारी नहीं करता, तब तक इसे केवल कागजी कार्यवाही ही माना जाएगा।

Matribhumi Samachar – Punjab Education News

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