घाटमपुर: ग्रीनफील्ड हाईवे की लोक सुनवाई में हंगामा, किसानों ने कहा- “पहले जमीन का हिसाब, फिर पेड़-पौधों की बात”

Saransh Kanaujia
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घाटमपुर. तहसील सभागार में बुधवार को ग्रीनफील्ड हाईवे की पर्यावरणीय स्वीकृति को लेकर आयोजित लोक सुनवाई हंगामेदार रही। जहाँ अधिकारी पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण पर किसानों के सुझाव मांग रहे थे, वहीं किसानों ने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक उनकी जमीन के अधिग्रहण और मुआवजे की स्थिति स्पष्ट नहीं होगी, वे किसी अन्य विषय पर चर्चा नहीं करेंगे।

“पहले जमीन का हिसाब, फिर पेड़-पौधों की बात”

बैठक में उपस्थित प्रभावित गांवों के किसानों ने प्रशासन के सामने अपनी चिंताएं रखीं। किसानों का कहना था कि उन्हें अभी तक अधिग्रहण के संबंध में कोई आधिकारिक नोटिस नहीं मिला है, जिससे क्षेत्र में अफवाहों का बाजार गर्म है। टेनापुर के विजय बहादुर सिंह ने नोटिस न मिलने का मुद्दा उठाया, जिस पर अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अभी केवल समाचार पत्रों में प्रकाशन हुआ है और जल्द ही व्यक्तिगत नोटिस भेजे जाएंगे।

हिस्सेदारी और मुआवजे का पेंच

अंश निर्धारण (बंटवारा) को लेकर पूछे गए सवालों पर एडीएम ने किसानों को सलाह दी कि वे अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी होने से पहले अपना सरकारी बंटवारा करवा लें। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि रिकॉर्ड दुरुस्त नहीं हुए, तो गाटा के सभी हिस्सेदारों को बराबर मुआवजा बांट दिया जाएगा।

हाईवे का खाका और पर्यावरण योजना

बैठक में एनएचएआई और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने परियोजना का विवरण साझा किया:

  • क्षेत्र: घाटमपुर में हाईवे का 49 किमी हिस्सा।

  • निर्माण: 23 माइनर ब्रिज, 5 मेजर ब्रिज और 110 निकासी नाले।

  • वृक्षारोपण: 1500 पेड़ों की कटान के बदले 10 गुना (15,000) पेड़ लगाने का लक्ष्य।

  • तकनीक: स्थानीय प्रजातियों (नीम, शीशम, पीपल) के लिए मियावाकी पद्धति का उपयोग होगा।

बाढ़ के खतरे पर चेतावनी

कैथा निवासी एडवोकेट पंकज सचान ने सुझाव दिया कि हाईवे के कट और पुलों का निर्माण प्राकृतिक जल बहाव के अनुसार ही किया जाए, ताकि भविष्य में क्षेत्र को बाढ़ के खतरे से बचाया जा सके।

बैठक में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अजीत कुमार सुमन, एनएचएआई के परियोजना प्रबंधक पंकज यादव सहित एडीएम, एसडीएम और तहसीलदार मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

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