बलूचिस्तान में मानवाधिकारों का हनन: लापता छात्र जुनैद अहमद का गोलियों से छलनी शव बरामद

Saransh Kanaujia
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क्वेटा: बलूचिस्तान में लक्षित हत्याओं और जबरन गायब किए जाने (Enforced Disappearances) का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक और चौंकाने वाली घटना में, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा कथित तौर पर अगवा किए गए 22 वर्षीय बलूच छात्र जुनैद अहमद की निर्मम हत्या कर दी गई है।

मुख्य घटनाक्रम

बलूच नेशनल मूवमेंट (BNM) के मानवाधिकार विभाग ‘पांक’ द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, जुनैद अहमद का शव रविवार को क्वेटा के पूर्वी बाईपास इलाके से बरामद हुआ। रिपोर्टों के अनुसार:

  • हिरासत से हत्या तक: जुनैद को 23 जनवरी को क्वेटा के ‘बाल अस्पताल’ से पाकिस्तान के आतंकवाद विरोधी विभाग (CTD) द्वारा कथित तौर पर हिरासत में लिया गया था।

  • अमानवीय क्रूरता: बरामदगी के वक्त छात्र के हाथ-पैर बंधे हुए थे और उसके शरीर पर गोलियों के कई निशान पाए गए, जो सीधे तौर पर ‘कस्टोडियल टॉर्चर’ और हत्या की ओर इशारा करते हैं।

  • लगातार मिल रहे शव: जुनैद के अलावा रविवार को ही तीन अन्य लापता बलूच छात्रों के शव भी बरामद हुए हैं, जो पिछले काफी समय से लापता बताए जा रहे थे।

मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया

‘पांक’ और अन्य क्षेत्रीय संगठनों ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे “पकड़ो और मारो” (Kill and Dump) की नीति का हिस्सा बताया है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि:

  1. प्रांत में छात्रों और युवाओं को बिना किसी कानूनी वारंट के उठाया जा रहा है।

  2. अदालती कार्यवाही के बजाय फर्जी मुठभेड़ों या हिरासत में हत्याओं का सहारा लिया जा रहा है।

  3. बलूचिस्तान में अभिव्यक्ति की आज़ादी और शिक्षा के अधिकार को भय के माहौल से दबाया जा रहा है।

बढ़ता आक्रोश

इन हत्याओं के बाद क्वेटा समेत प्रांत के कई हिस्सों में तनाव व्याप्त है। बलूच प्रदर्शनकारियों और पीड़ित परिवारों का आरोप है कि पाकिस्तानी सेना और सीटीडी (CTD) अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों का उल्लंघन कर रहे हैं। हाल के महीनों में बलूच एकजुटता समिति (BYC) के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों ने इन ‘जबरन गायब’ किए गए लोगों की सुरक्षा का मुद्दा वैश्विक मंच पर उठाया है।

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