NIA कोर्ट का बड़ा फैसला: लश्कर आतंकी बहादुर अली के मददगारों को 15-15 साल की जेल

Saransh Kanaujia
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नई दिल्ली. दिल्ली की पटियाला हाउस स्थित विशेष एनआईए (NIA) अदालत ने आतंकवाद के खिलाफ एक कड़ा रुख अपनाते हुए दो मददगारों को सलाखों के पीछे भेज दिया है। अदालत ने प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के पाकिस्तानी आतंकी बहादुर अली को रसद और पनाह मुहैया कराने के जुर्म में जहूर अहमद पीर और नजीर अहमद पीर को 15-15 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

न्यायालय का सख्त रुख

विशेष एनआईए न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष ने आरोपियों के खिलाफ लगे आरोपों को संदेह से परे साबित किया है। अदालत ने पाया कि दोनों दोषियों ने न केवल आतंकी को शरण दी, बल्कि भारत के खिलाफ रची गई बड़ी आतंकी साजिश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अदालत ने इन दोनों को यूएपीए (UAPA) की निम्नलिखित धाराओं के तहत दंडित किया:

  • धारा 18: आतंकी साजिश का हिस्सा होना।

  • धारा 19: आतंकवादियों को शरण देना और रसद मुहैया कराना।

  • धारा 39: प्रतिबंधित आतंकी संगठन को समर्थन देना।

क्या था पूरा मामला?

यह मामला जुलाई 2016 का है, जब कश्मीर में बुरहान वानी की मौत के बाद पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने भारत में हमलों की साजिश रची थी।

  1. घुसपैठ: पाकिस्तानी आतंकी बहादुर अली अपने साथियों के साथ सीमा पार कर भारत में घुसा था।

  2. गिरफ्तारी: सुरक्षा बलों की मुठभेड़ में उसके साथी मारे गए, जबकि बहादुर अली को जिंदा पकड़ लिया गया था।

  3. मदद: जांच में खुलासा हुआ कि घुसपैठ के बाद जहूर और नजीर ने बहादुर अली को जानते-बूझते हुए कि वह एक आतंकी है, उसे भोजन, ठिकाना और अन्य लॉजिस्टिक सहायता दी थी।

मुख्य आतंकी को पहले ही हो चुकी है सजा

उल्लेखनीय है कि इस मामले के मुख्य आतंकी बहादुर अली ने मार्च 2021 में ही अपना गुनाह कबूल कर लिया था। उसे अदालत ने पहले ही 10 साल के कारावास की सजा सुनाई थी। अब उसे पनाह देने वाले स्थानीय मददगारों को भी उनके किए की सजा मिल गई है।

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