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कटनी में हड़कंप: पटना-पुणे एक्सप्रेस से 163 बच्चे रेस्क्यू, IB को बड़े मानव तस्करी सिंडिकेट का शक

Saransh Kanaujia
4 Min Read

भोपाल । बुधवार,  15 अप्रैल 2026

मध्य प्रदेश के कटनी रेलवे स्टेशन पर रविवार की दरम्यानी रात उस वक्त हड़कंप मच गया, जब Government Railway Police (GRP) और RPF ने एक खुफिया सूचना के आधार पर पटना-पुणे एक्सप्रेस को घेरा। ट्रेन के स्लीपर कोचों की तलाशी के दौरान पुलिस को 163 नाबालिग बच्चे मिले, जिनकी उम्र 6 से 14 वर्ष के बीच है। इन बच्चों को बिहार के अररिया जिले से महाराष्ट्र और कर्नाटक के मदरसों में ले जाया जा रहा था।

IB की सक्रियता और गंभीर धाराएं

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) ने मोर्चा संभाल लिया है। GRP ने कार्रवाई करते हुए 8 लोगों (सद्दाम, अमान उल्ला, मो. जाहिर, आमिर खान, हाफिज अबू तालिम, मो. इस्लाम, नौसाद और राशिद) को हिरासत में लिया है। पुलिस ने इनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 143 (मानव तस्करी) के तहत मामला दर्ज किया है।

जांच के घेरे में ‘मदरसा कनेक्शन’

आरोपितों ने दावा किया है कि वे बच्चों को धार्मिक शिक्षा के लिए लातूर के जामिया अशरफिया अंजुमने इस्लामिया और विदर्भ के दारुल उलूम इमदादिया मदरसा ले जा रहे थे। हालांकि, शुरुआती जांच में सामने आया है कि:

  1. इतनी बड़ी संख्या में बच्चों के स्थानांतरण के लिए आवश्यक CWC (बाल कल्याण समिति) के दस्तावेज गायब थे।

  2. बिहार में पर्याप्त शिक्षण संस्थान होने के बावजूद बच्चों को हजारों किलोमीटर दूर भेजने का कोई तार्किक कारण नहीं मिला।

  3. आरोपितों के पास बच्चों के यात्रा टिकट और पहचान संबंधी दस्तावेजों में भारी विसंगतियां पाई गई हैं।

“हम इस बात की पुष्टि कर रहे हैं कि क्या यह वाकई शिक्षा का मामला है या बच्चों को बाल श्रम (Forced Labour) के लिए ले जाया जा रहा था। महाराष्ट्र और बिहार पुलिस के संपर्क में हैं।” > — सिमाला प्रसाद, एसपी (जीआरपी), जबलपुर

फंडिंग और सिंडिकेट पर शक

IB इस बात की गहनता से जांच कर रही है कि इन बच्चों के रहने, खाने और सफर का खर्च कौन उठा रहा था। आरोपितों ने ‘समाज से मिलने वाले चंदे’ का हवाला दिया है, लेकिन एजेंसियां किसी बड़े संगठित नेटवर्क या विदेशी फंडिंग के पहलू को भी नकार नहीं रही हैं।

बच्चों और अभिभावकों की वर्तमान स्थिति

  • आश्रय गृह: सभी 163 बच्चों को फिलहाल कटनी और जबलपुर के सरकारी आश्रय गृहों में रखा गया है।

  • अभिभावकों के बयान: लगभग 54 अभिभावक अररिया से कटनी पहुंच चुके हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग उनके बयानों का मिलान कर रहा है।

  • वापसी की प्रक्रिया: जिला प्रशासन अररिया प्रशासन की रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है, जिसके बाद सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत बच्चों को वापस बिहार भेजा जाएगा।

प्रशासनिक कदम

महिला एवं बाल विकास विभाग और बाल संरक्षण आयोग ने स्पष्ट किया है कि बिना पूर्व सूचना और पंजीकरण के बच्चों का इस तरह से राज्य के बाहर ले जाना ‘किशोर न्याय अधिनियम’ (JJ Act) का उल्लंघन है। जाँच टीम अब उन मदरसों के भौतिक सत्यापन के लिए महाराष्ट्र रवाना हो चुकी है जिनका नाम पूछताछ में सामने आया है।

हाइलाइट्स:

  • पटना-पुणे एक्सप्रेस से 163 नाबालिग बच्चे रेस्क्यू, बिहार से महाराष्ट्र ले जाए जा रहे थे।

  • IB और GRP की संयुक्त जांच शुरू; 8 संदिग्ध ‘शिक्षक’ गिरफ्तार, BNS की धारा 143 के तहत मामला दर्ज।

  • बिना वैध दस्तावेजों के सफर और फंडिंग के संदिग्ध स्रोतों ने खड़े किए गंभीर सवाल।

निष्कर्ष: यह मामला केवल एक सामान्य स्थानांतरण नहीं बल्कि एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क की ओर इशारा कर रहा है। IB की जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि इस पूरी कवायद के पीछे का असली मास्टरमाइंड कौन है।

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