पुणे में सनसनी: रेस्क्यू सेंटर से 13 बांग्लादेशी लड़कियां फरार, केयरटेकर को बंधक बनाकर किया हमला

Saransh Kanaujia
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पुणे | सोमवार, 13 अप्रैल 2026

पुणे के हडपसर-मोहम्मदवाड़ी रोड पर स्थित ‘रेस्क्यू फाउंडेशन’ से 13 बांग्लादेशी लड़कियों के फरार होने की घटना ने पूरे प्रशासन को हिलाकर रख दिया है। घटना 11-12 अप्रैल 2026 की दरम्यानी रात और सुबह के बीच की बताई जा रही है।

जानकारी के अनुसार, इन लड़कियों ने बेहद शातिराना तरीके से भागने की योजना बनाई थी। एक लड़की ने आधी रात को अचानक तबीयत बिगड़ने और दवा लेने का बहाना बनाया। जैसे ही केयरटेकर लक्ष्मी कांबले ने दरवाजा खोला, पहले से घात लगाए बैठी अन्य लड़कियों ने उन पर धावा बोल दिया। लड़कियों ने न केवल केयरटेकर के मुंह में कपड़ा ठूंसकर उन्हें मेडिकल रूम में बंधक बनाया, बल्कि विरोध करने पर सुरक्षाकर्मी पर भी हमला किया और उसे दांतों से काटकर घायल कर दिया।

सुरक्षा में चूक: लापरवाही और खुला गेट

जिस समय यह घटना हुई, सेंटर के भीतर सफाई का कार्य चल रहा था। इसी का फायदा उठाकर लड़कियां मुख्य गेट तक पहुंचने में सफल रहीं। गेट खुला होने के कारण वे आसानी से परिसर से बाहर निकल गईं। यह पूरी घटना वहां लगे CCTV कैमरों में कैद हो गई है, जिसमें लड़कियों को भागते हुए देखा जा सकता है।

पुलिस की कार्रवाई: 2 पकड़ी गईं, 11 अब भी रडार से बाहर

घटना की सूचना मिलते ही कोंढवा और हडपसर पुलिस स्टेशन की टीमें अलर्ट हो गईं। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए हडपसर और सैयद नगर के पास से 2 लड़कियों को फिर से हिरासत में ले लिया है। हालांकि, शेष 11 लड़कियां अब भी फरार हैं। पुणे पुलिस की अपराध शाखा (Crime Branch) ने उनकी तलाश के लिए अलग-अलग टीमें बनाई हैं और रेलवे स्टेशनों व बस स्टैंडों पर निगरानी बढ़ा दी गई है।

व्यवस्थाओं पर उठे गंभीर सवाल

इस घटना के बाद रेस्क्यू सेंटर की व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे हैं:

  1. सुरक्षा की कमी: संस्था प्रबंधन का आरोप है कि मार्च 2024 से उनकी स्थायी पुलिस सुरक्षा हटा ली गई थी। बार-बार पत्र लिखने के बावजूद सुरक्षा बहाल नहीं की गई।

  2. क्षमता से अधिक भीड़: सेंटर में निर्धारित क्षमता से अधिक महिलाओं को रखा गया था, जिससे उन पर नजर रखना मुश्किल हो रहा था।

  3. प्रत्यार्पण में देरी: ये सभी लड़कियां मानव तस्करी (Human Trafficking) से बचाई गई थीं। उन्हें उनके देश वापस भेजने की कानूनी प्रक्रिया काफी धीमी चल रही थी, जिससे वे मानसिक तनाव और नैराश्य (Depression) में थीं।

आगे क्या?

पुलिस अब इन लड़कियों के स्थानीय संपर्कों की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या उन्हें बाहर से किसी ने मदद मुहैया कराई थी। वहीं, महिला एवं बाल कल्याण विभाग ने भी इस मामले में रिपोर्ट तलब की है।

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