लद्दाख की लोकतांत्रिक बहाली के लिए सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम: केंद्र से माँगी स्टेटस रिपोर्ट

Saransh Kanaujia
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लेह. भारत के उच्चतम न्यायालय ने लद्दाख के प्रमुख पर्यावरण कार्यकर्ता और सुधारक सोनम वांगचुक द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को कड़ा निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि लद्दाख के संवैधानिक भविष्य और वहां के नागरिकों की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं को अनिश्चितकाल के लिए लटकाया नहीं जा सकता।

केंद्र को नोटिस: तीन सप्ताह में मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को औपचारिक नोटिस जारी करते हुए लद्दाख के प्रतिनिधिमंडल और सरकार के बीच रुकी हुई वार्ता प्रक्रिया की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने केंद्र को अपना जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है।

याचिका का मुख्य आधार: छठी अनुसूची और लोकतंत्र

सोनम वांगचुक ने अपनी याचिका में लद्दाख की सुरक्षा और स्वायत्तता के लिए निम्नलिखित प्रमुख मांगें उठाई हैं:

  • छठी अनुसूची (Sixth Schedule): लद्दाख की संवेदनशील पारिस्थितिकी और जनजातीय संस्कृति को बचाने के लिए विशेष संवैधानिक दर्जा।

  • लोकतंत्र की बहाली: केंद्र शासित प्रदेश में जल्द से जल्द लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और विधानसभा की स्थापना।

  • विरोध का अधिकार: शांतिपूर्ण मार्च और प्रदर्शनों पर लगाई गई पाबंदियों को असंवैधानिक बताते हुए उन्हें हटाने की मांग।

 लद्दाख का ‘चार-सूत्रीय एजेंडा’

अदालत में हुई चर्चा के दौरान लद्दाख के प्रतिनिधियों की उन मांगों को पुनः दोहराया गया, जो पिछले लंबे समय से लंबित हैं:

  1. लद्दाख के लिए पूर्ण राज्य का दर्जा

  2. स्थानीय निवासियों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण

  3. लेह और कारगिल जिलों के लिए अलग-अलग संसदीय सीटें

  4. संवैधानिक सुरक्षा उपाय (छठी अनुसूची)।

अगली सुनवाई: फरवरी 2026 का पहला सप्ताह

न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली सुनवाई फरवरी 2026 के पहले सप्ताह में तय की है। कानून विशेषज्ञों का मानना है कि यदि केंद्र सरकार इस अवधि में कोई ठोस समाधान या वार्ता का प्रस्ताव पेश नहीं करती है, तो अदालत इस मामले में कोई ऐतिहासिक आदेश पारित कर सकती है।

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