जहानाबाद के चांढ़ गांव में खुदाई के दौरान मिली भगवान विष्णु की प्राचीन अष्टधातु मूर्ति: गांव में उत्सव का माहौल

Saransh Kanaujia
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पटना । सोमवार, 11 मई 2026

बिहार के जहानाबाद जिले से एक विस्मरणीय घटना सामने आई है। जिले के मखदुमपुर प्रखंड अंतर्गत चांढ़ गांव में चल रहे तालाब सौंदर्यीकरण और खुदाई कार्य के दौरान एक अत्यंत प्राचीन और भव्य भगवान विष्णु की अष्टधातु मूर्ति बरामद हुई है। जैसे ही जेसीबी की खुदाई के दौरान मिट्टी हटी और प्रतिमा की काली आभा चमकी, वहां मौजूद मजदूरों और ग्रामीणों की आंखें फटी की फटी रह गईं।

तालाब से प्रकट हुए ‘हरि’

जानकारी के अनुसार, गांव के एक पुराने तालाब में खुदाई का काम चल रहा था। गहराई में जैसे ही धातु की किसी वस्तु से मिट्टी का संपर्क टूटा, वहां भगवान विष्णु की चतुर्भुज प्रतिमा दिखाई दी। ग्रामीणों ने तुरंत खुदाई रुकवाकर सावधानी से प्रतिमा को बाहर निकाला। पानी से साफ करते ही अष्टधातु की वह चमक बिखरने लगी, जो सदियों से मिट्टी की परतों के नीचे दबी थी।

नवीनतम अपडेट (Update)

प्रारंभिक सूचनाओं में इसे केवल एक प्राचीन पत्थर की मूर्ति माना जा रहा था, लेकिन विशेषज्ञों और गांव के अनुभवी लोगों के निरीक्षण के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि यह बहुमूल्य अष्टधातु से निर्मित है। मूर्ति की शिल्पकला पालकालीन (Pala Empire) प्रतीत होती है, जो बिहार के इस क्षेत्र में 8वीं से 12वीं शताब्दी के बीच काफी समृद्ध थी। वर्तमान में, जिला प्रशासन ने पुरातत्व विभाग (Archeology Department) को सूचित कर दिया है ताकि इसकी वैज्ञानिक जांच हो सके।

दिवाली सा माहौल और सुरक्षा का घेरा

मूर्ति के मिलने की खबर मिलते ही चांढ़ गांव एक तीर्थस्थल में तब्दील हो गया है।

  • मंगलगीत और आरती: महिलाओं ने पारंपरिक सोहर और मंगलगीत गाकर भगवान का अभिनंदन किया।

  • सूर्य मंदिर में स्थान: फिलहाल मूर्ति को गांव के ही प्राचीन सूर्य मंदिर में रखा गया है।

  • ग्रामीणों का संकल्प: स्थानीय युवाओं और बुजुर्गों ने मिलकर एक “सुरक्षा घेरा” बनाया है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि यह उनके गांव की धरोहर है और वे इसे किसी भी संग्रहालय में ले जाने के बजाय वहीं एक भव्य मंदिर बनवाकर स्थापित करना चाहते हैं।

पुरातत्व प्रेमियों की दृष्टि

मखदुमपुर का यह क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से काफी महत्वपूर्ण रहा है (निकटवर्ती बराबर की गुफाएं इसका प्रमाण हैं)। इस नई खोज से पुरातत्वविदों को उम्मीद है कि खुदाई के आस-पास के क्षेत्रों में शोध करने पर प्राचीन बस्तियों या किसी लुप्त मंदिर के अवशेष भी मिल सकते हैं।

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