रायसीना संवाद 2026: कोच्चि में ईरानी जहाज की डॉकिंग पर एस जयशंकर का बड़ा बयान, ‘मानवता पहले’

Saransh Kanaujia
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नई दिल्ली. मिडिल ईस्ट में जारी भारी तनाव और हिंद महासागर में गहराते सुरक्षा संकट के बीच, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक स्पष्टीकरण दिया है। रायसीना संवाद 2026 के मंच से बोलते हुए उन्होंने ईरानी नौसैनिक जहाज को कोच्चि बंदरगाह पर डॉकिंग (लंगर डालने) की अनुमति देने के भारत के फैसले का पुरजोर बचाव किया।

मुख्य बिंदु: संकट में मानवीय सहायता

विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत का यह निर्णय किसी सैन्य रणनीति या राजनीतिक झुकाव का परिणाम नहीं था। उन्होंने इस कदम के पीछे के कारणों को विस्तार से साझा किया:

  • तकनीकी आपातकाल: ईरान की ओर से संदेश मिला था कि उनके एक जहाज में गंभीर तकनीकी खराबी आ गई है और वह भारतीय समुद्री सीमा के निकट संकट में है।

  • युवा कैडेट्स की सुरक्षा: जहाज पर बड़ी संख्या में युवा कैडेट सवार थे। जयशंकर ने कहा, “जब यह मिशन शुरू हुआ था तब हालात सामान्य थे, लेकिन भारत पहुँचते-पहुँचते यह जहाज युद्ध और संघर्ष के बीच फंस गया।”

  • समय सीमा: भारत ने मानवीय आधार पर 1 मार्च को जहाज को कोच्चि बंदरगाह में प्रवेश की अनुमति दी थी।

पृष्ठभूमि: MILAN 2026 और IRIS Dena का डूबना

यह विवाद उन तीन ईरानी जहाजों (IRIS Dena, IRIS Lavan और IRIS Bushehr) से जुड़ा है, जिन्होंने फरवरी में विशाखापत्तनम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास (MILAN 2026) में हिस्सा लिया था।

हालाँकि, स्थिति तब और गंभीर हो गई जब 4 मार्च को श्रीलंका के गाले (Galle) के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में अमेरिकी पनडुब्बी के टॉरपीडो हमले में ईरानी फ्रिगेट IRIS Dena डूब गया। इस हमले में:

  • 87 नाविकों की मौत हो गई।

  • 32 नाविकों को सुरक्षित बचाकर इलाज के लिए गाले ले जाया गया।

“हमने सही काम किया”

वैश्विक शक्तियों के बीच बढ़ते तनाव पर टिप्पणी करते हुए विदेश मंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि भारत ने कानूनी पेचीदगियों के बजाय जीवन बचाने को प्राथमिकता दी।

“संवेदनशील स्थितियों में हमारा उद्देश्य मानवीय मदद पहुँचाना है। हमने जो किया, वह पूरी तरह मानवीय आधार पर था और मुझे विश्वास है कि हमने सही काम किया।”

एस. जयशंकर, विदेश मंत्री

विशेषज्ञों का विश्लेषण: रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ती शत्रुता ने हिंद महासागर को एक ‘हॉटस्पॉट’ बना दिया है। ऐसे में भारत का यह कदम उसकी ‘स्वतंत्र विदेश नीति’ और संकट के समय एक जिम्मेदार क्षेत्रीय शक्ति होने की छवि को पुख्ता करता है।

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