इस्लामाबाद। पाकिस्तान में एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता का दौर गहराता नजर आ रहा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार गंभीर आंतरिक कलह और भारी दबाव का सामना कर रही है। देश की राजधानी इस्लामाबाद को सुरक्षा के लिहाज से कंटेनरों से सील कर दिया गया है। इस बीच, 21 साल पुराने देश के सबसे बड़े घोटाले के सामने आने के बाद मंत्री स्तर पर तीखी जुबानी जंग छिड़ गई है।
21 साल का सबसे बड़ा घोटाला आया सामने
विवाद की शुरुआत पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री (Interior Minister) और पीसीबी (PCB) अध्यक्ष मोहसिन नकवी के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने दावा किया कि देश के इतिहास का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार उजागर हुआ है। नकवी के मुताबिक, पिछले 21 वर्षों से जजों, राजनेताओं, नौकरशाहों और शीर्ष बैंकरों को रिश्वत दी जा रही थी। उन्होंने खुले तौर पर पाकिस्तान के प्रशासनिक और न्यायिक ढांचे को विफल करार दिया।
मंत्रियों में छिड़ी जंग: ख्वाजा आसिफ का पलटवार
नकवी के इस बयान के बाद शहबाज कैबिनेट के भीतर ही फूट खुलकर सामने आ गई है। सत्तारूढ़ PML-N के वरिष्ठ नेता और रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने मोहसिन नकवी पर जोरदार हमला बोला है। आसिफ ने तंज कसते हुए कहा कि “नकवी इतने शक्तिशाली हैं कि वे प्रधानमंत्री तक को जवाबदेह नहीं मानते और कैबिनेट बैठकों से गायब रहते हैं।” उन्होंने सलाह दी कि दूसरों पर आरोप लगाने के बजाय नकवी को अपने ही गृह मंत्रालय और पीसीबी सुधार पर ध्यान देना चाहिए।
सेना प्रमुख आसिम मुनीर और ‘पावर प्ले’ की सुगबुगाहट
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल एक भ्रष्टाचार का मामला नहीं, बल्कि पाकिस्तान में चल रहे बड़े ‘पावर प्ले’ का हिस्सा है। मोहसिन नकवी को पाकिस्तान सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर का बेहद करीबी माना जाता है। नकवी द्वारा नागरिक सरकार और न्यायपालिका पर इस तरह के हमले को सेना द्वारा तख्तापलट करने या सत्ता पर अपनी पकड़ और अधिक मजबूत करने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।
राजधानी इस्लामाबाद बनी छावनी
संभावित जनाक्रोश, राजनीतिक खींचतान और विरोध-प्रदर्शनों की आशंका को देखते हुए राजधानी इस्लामाबाद में सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त कर दी गई है। शहर के प्रमुख प्रवेश और निकास मार्गों को भारी-भरकम कंटेनर लगाकर पूरी तरह सील कर दिया गया है। जगह-जगह भारी पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है, जिससे पूरे शहर में तनाव का माहौल है।
अचानक बदले इस घटनाक्रम ने शहबाज शरीफ और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के नेतृत्व वाली सरकार के भविष्य पर बड़ा प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।